16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुनिया भर में बैन हो सोशल मीडिया, इस कंपनी के CEO ने कर दी गजब की मांग

Social Media Ban Teens: पिंटरेस्ट CEO ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की मांग की, जानिए क्यों इसे खतरनाक माना जा रहा है और दुनिया भर में इस पर क्या बहस चल रही है.

Published date india.com Published: March 22, 2026 11:19 PM IST
pinterest ceo
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Social Media Ban Teens: पिंटरेस्ट के CEO बिल रेडी ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाई जाए. उनका कहना है कि आज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की मानसिक सेहत और उनके विकास पर गलत असर डाल रहे हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई देश पहले से ही बच्चों के लिए सख्त नियम बनाने पर काम कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों ने तो इस दिशा में कदम भी उठाए हैं और वहां नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर सीमाएं तय की जा रही हैं.

बच्चों पर सोशल मीडिया का बढ़ता असर

बिल रेडी का मानना है कि आज के बच्चे एक बड़े सोशल एक्सपेरिमेंट का हिस्सा बन गए हैं. बिना किसी कंट्रोल के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बच्चों में तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चों का ध्यान जल्दी भटकता है और पढ़ाई या अन्य जरूरी कामों पर फोकस कम हो जाता है. रेडी के अनुसार, यह सिर्फ एक छोटी समस्या नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह और गंभीर रूप ले सकती है. इसलिए अभी कदम उठाना बहुत जरूरी है.

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सरकारों से सख्त नियम बनाने की अपील

रेडी का कहना है कि सिर्फ टेक कंपनियों पर भरोसा करना सही नहीं है. कंपनियां अपने फायदे के हिसाब से फैसले लेती हैं, इसलिए सरकारों को आगे आकर सख्त नियम बनाने चाहिए. उनका सुझाव है कि एक ऐसा ग्लोबल नियम बनाया जाए, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर साफ रोक हो. इसके साथ ही मोबाइल कंपनियों और ऐप बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि नियमों का सही तरीके से पालन हो सके. उनका मानना है कि अभी जो सेफ्टी फीचर्स दिए जा रहे हैं, वे बच्चों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं.

नई तकनीक और बढ़ते खतरे

रेडी ने यह भी कहा कि AI जैसी नई तकनीकें इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं. आजकल सोशल मीडिया में AI चैटबॉट्स और स्मार्ट एल्गोरिदम का इस्तेमाल हो रहा है, जो यूजर्स के व्यवहार और सोच को प्रभावित करते हैं. बच्चों के लिए यह और ज्यादा खतरनाक हो सकता है, क्योंकि उनकी सोच और आदतें अभी बन रही होती हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गाड़ी चलाने या शराब पीने के लिए उम्र सीमा तय होती है, वैसे ही सोशल मीडिया के लिए भी उम्र की सीमा जरूरी है. भले ही यह पूरी तरह परफेक्ट न हो, लेकिन इससे नुकसान कम किया जा सकता है.

दुनिया भर में बढ़ती बहस

आज दुनिया भर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है. ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, स्पेन, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश सोशल मीडिया को लेकर सख्त नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं. वहीं, कई बड़ी टेक कंपनियां इस तरह के बैन के खिलाफ हैं और उनका कहना है कि पैरेंटल कंट्रोल और एज वेरिफिकेशन जैसे तरीके ज्यादा बेहतर हैं. लेकिन बिल रेडी का मानना है कि अगर कंपनियां सिर्फ बहाने बनाती रहीं, तो उनकी विश्वसनीयता कम हो जाएगी. Pinterest ने खुद कुछ सेफ्टी फीचर्स लागू किए हैं, जैसे 16 साल से कम उम्र वालों के लिए मैसेजिंग और पब्लिक इंटरैक्शन सीमित करना. अब देखना यह है कि आने वाले समय में सरकारें इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती हैं और बच्चों के लिए सोशल मीडिया कितना सुरक्षित बन पाता है.

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