Reliance Jio की एंट्री के साथ ही भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री में क्रांति आ गई थी। इसकी वजह थी कंपनी द्वारा दिए जानें वाले जबरदस्त टेलीकॉम प्लान। कंपनी ने अपने ग्राहकों को शुरुआत से ही बेहद कम कीमत में अनलिमिटेड डाटा और कॉलिंग सर्विस दी है। यही कारण है कि रिलायंस जियो के मार्केट में कदम रखने के साथ ही सभी टेलीकॉम कंपनियों ने डाटा और कॉलिंग की कीमत में जबरदस्त कटौती की है। हालांकि अब कंपनी ने एक नया कदम उठाया है। अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने यूजर्स से किसी अन्य कंपनी के नेटवर्क पर कॉल करने पर छह पैसे प्रति मिनट की दर से शुल्क लेने की घोषणा की है। यानी अब से Jio यूजर्स को एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के नेटवर्क पर कॉल के लिए छह पैसे प्रति मिनट का चार्ज देना होगा।

बता दें कि यूजर्स के लिए यह खबर पूरी तरह से निराशाजनक नहीं होगी क्योंकि कंपनी ने घोषणा की है कि इसकी भरपाई के लिये यूजर्स को बराबर मूल्य का मुफ्त डाटा मिलेगा। इसका मतलब है यूजर्स जियो को छोड़ अन्य नेटवर्क पर जितने पैसों की बात करेंगे उन्हें उतने मुल्य का फ्री डाटा मिलेगा। ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि जियो अपने यूजर्स से वॉयस कॉल के लिए शुल्क लेगी। जियो द्वारा यह कदम उस समय उठाया गया है जबकि इस तरह के संकेत हैं कि कॉल जोड़ने का शुल्क 31 दिसंबर की पहले तय की गई समयसीमा तक समाप्त नहीं हो पाएगा।

जियो ने इसके लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा पैदा की गई अनिश्चितता को जिम्मेदार ठहराया है। जियो ने कहा है कि ट्राई ने इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क (आईयूसी) के मुद्दे को फिर खोल लिया है। वहीं उद्योग की अन्य कंपनियों का कहना है कि यह जियो का ‘यू-टर्न’ है जिसने ग्राहकों को जीवनभर मुफ्त कॉल का वादा किया था।

जियो ने बयान में कहा कि जब तक कि उसे अपने उपभोक्ताओं द्वारा किसी अन्य नेटवर्क पर फोन करने के एवज में किसी कंपनी को भुगतान करना होगा, तब तक उनसे यह शुल्क लिया जाएगा। कंपनी ने कहा कि जियो के फोन या लैंडलाइन पर कॉल करने पर शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही व्हाट्सएप और फेसटाइम समेत इस तरह के अन्य प्लेटफॉर्मों से किये गये फोन कॉल पर भी शुल्क नहीं लगेगा। सभी नेटवर्क के इनकमिंग फोन नि:शुल्क रहेंगे।

 

 

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरकनेक्ट प्रयोग शुल्क (आईयूसी) को 2017 में 14 पैसे से घटाकर छह पैसे प्रति मिनट कर दिया था। ट्राई ने इस व्यवस्था को 31 दिसंबर, 2019 तक समाप्त करने का प्रस्ताव किया था। अब नियामक ने इस बात की समीक्षा के लिए परिचर्चा पत्र निकाला है क्या इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

कंपनी ने कहा कि चूंकि जियो के नेटवर्क पर वॉयस कॉल मुफ्त है। ऐसे में प्रतिद्वंद्वी नेटवर्कों के काफी ऊंचा शुल्क देने वाले 35 से 40 करोड़ 2जी उपभोक्ता उसके ग्राहकों को मिस्ड कॉल देते हैं। इस वजह से पिछले तीन साल के दौरान भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को 13,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा है।

इस फैसले के बाद जियो की प्रतिद्वंद्वी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने आरोप लगाया है कि रिलायंस जियो द्वारा अपने ग्राहकों से नेटवर्क से प्रतिद्वंद्वी फोन कंपनियों के नेटवर्क पर वॉयस कॉल के लिए छह पैसे प्रति मिनट का शुल्क लगाने का फैसला इंटरकनेक्ट शुल्क (आईयूसी) को नीचे लाने को दबाव बनाने का प्रयास है।

 

 

वहीं वोडाफोन ने बयान में कहा कि एक दूरसंचार सेवाप्रदाता द्वारा अन्य सेवाप्रदाताओं के नेटवर्क पर कॉल के लिए शुल्क लेने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। इससे यह तथ्य भी सामने नहीं आता कि इंटरकनेक्ट आपरेटरों के बीच एक करार है और यह उपभोक्ता मूल्य का मामला नहीं है।

(इनपुट पीटीआई से)