
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
Trial against social media addiction in US Court:आज के डिजिटल युग में क्या घंटों तक सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करना एक बीमारी है? यह सवाल अमेरिका के कैलिफोर्निया की एक अदालत में तब गूंजा जब इंस्टाग्राम के सीईओ एडम मोसेरी गवाही देने पहुंचे. यह ट्रायल सैकड़ों परिवारों और स्कूलों द्वारा मेटा, टिकटॉक और यूट्यूब जैसी दिग्गज कंपनियों पर किए गए मुकदमों का हिस्सा है. पैरेंट्स ने गूगल- मेटा को पार्टी बनाकर ये मुकदमा दायर किया है. इस ट्रायल में पैरेंट्स का दावा है कि सोशल मीडिया एप को लगातार एडिक्टिव बनाया जा रहा है, जो बच्चों के मेंटल पर बुरा प्रभाव डाल रहा है, उन्हें डिप्रेशन और सुसाइडल थॉट की ओर धकेल रहा है. ट्रायल मेंं अदालत ने इंस्टाग्राम के सीईओ को पेश होने को कहा था. आइये जानते हैं उन्होंने अपनी ओर से क्या दलीलें रखीं.
इंस्टाग्राम की ओर से पेश अदालत में एडम मोसेरी ने सबसे महत्वपूर्ण दलील यह थी कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग ‘क्लीनिकल एडिक्शन’ नहीं है. उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक अभी तक सोशल मीडिया एडिक्शन को एक आधिकारिक बीमारी के रूप में क्लासिफाई नहीं करते हैं. मोसेरी के अनुसार, यदि कोई बच्चा 16 घंटे ऐप चला रहा है, तो वह समस्याग्रस्त उपयोग (Problematic Use) हो सकता है, लेकिन इसे नशा (addiction) कहना तकनीकी रूप से गलत है.
बदलने जा रहा Aadhaar! अब कार्ड पर नहीं दिखेंगे नाम-नंबर, जानें नया डिजाइन कैसा होगा?
7
मुकदमा लड़ रहे परिवारों और उनके वकीलों ने इंस्टाग्राम के डिजाइन को डिजिटल कैसीनो करार दिया है. माता-पिता ने इन फीचर्स से आपत्ति जताई है,
इसे लेकर इंस्टाग्राम के सीईओ मोसेरी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे सुरक्षा के लिए नए फीचर्स का एक्सपेरिमेंट करते हैं, लेकिन वे कम से कम सेंसरशिप भी चाहते हैं. दूसरी ओर, मेटा के वकीलों का कहना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के बिगड़ने का कारण पारिवारिक मुद्दे या व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं, न कि सोशल मीडिया.
ट्रायल के दौरान वादी के वकील मार्क लैनियर ने चौंकाने वाले दस्तावेज पेश किए. एक कर्मचारी ने ईमेल में लिखा था कि इंस्टाग्राम एक ड्रग है और हम मूल रूप से इसे बेचने वाले (Pushers) हैं. एक अन्य शोधकर्ता ने चेतावनी दी कि एडम मोसेरी डोपामाइन शब्द सुनकर भड़क जाते हैं, लेकिन यह हकीकत है कि ऐप का डिजाइन जैविक और मनोवैज्ञानिक रूप से बच्चों को बांधे रखता है.
US के कैलिफोर्निया कोर्ट में जारी यह मामला केवल दलीलों तक सीमित नहीं है. अदालत में 20 वर्षीय युवती KGM उदाहरण पेश किया गया, जिसका दावा है कि इंस्टाग्राम के एडिक्टिव डिजाइन ने उसके डिप्रेशन और आत्महत्या के विचारों को बढ़ाया. KGM ने 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 9 साल की उम्र में इंस्टाग्राम चलाना शुरू किया था और पांचवी क्लास तक पहुंचते-पहुंचते उसने 284 वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया था. वहीं, जॉर्डन डेमे (17 वर्ष) के पिता भी वहां मौजूद थे, जिनके बेटे ने एक ऑनलाइन सेक्सटॉर्शन घोटाले के बाद आत्महत्या कर ली थी. इसलिए परिवार यह दावा कर रहे हैं कि कंपनी ने मुनाफे को बच्चों की सुरक्षा से ऊपर रखा.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Technology की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.