WhatsApp या ईमेल पर मिला लीगल समन? कैसे पहचानें असली या फेक, कैसे करें रिस्पॉन्ड

उत्तराखंड में न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटल युग के अनुरूप ढालते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में चेक बाउंस के मामलों में आरोपियों को WhatsApp, ईमेल और मोबाइल मैसेजिंग एप्स के जरिए आधिकारिक समन भेजे जा सकेंगे.

Published date india.com Updated: January 6, 2026 4:15 PM IST
WhatsApp या ईमेल पर मिला लीगल समन? कैसे पहचानें असली या फेक, कैसे करें रिस्पॉन्ड

Legal Summons On WhatsApp: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक बनाने और कानूनी कार्यवाही में तेजी लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. न्यायालय ने अब चेक बाउंस के मामलों में ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से समन भेजने को आधिकारिक मंजूरी दे दी है.

रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर के अनुसार, अब राज्य में चेक बाउंस के मामलों में समन केवल पारंपरिक डाक या भौतिक वितरण के तरीकों तक सीमित नहीं रहेंगे. यह महत्वपूर्ण निर्णय ‘उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स, 2025’ के तहत लिया गया है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अदालती कार्यवाही में लगने वाले समय को कम करना और लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण करना है.

नई व्यवस्था की गई लागू

उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, चेक बाउंस की शिकायतों के निपटारे के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया गया है. इसमें कई मुख्य बदलाव शामिल हैं.

डिजिटल जानकारी देना जरूरी

अब जब भी कोई शिकायतकर्ता चेक बाउंस की शिकायत दर्ज करेगा, तो उसे आरोपी व्यक्ति का ईमेल पता और व्हाट्सएप संपर्क विवरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा. इसके साथ ही, शिकायतकर्ता को एक हलफनामा भी देना होगा, जो यह प्रमाणित करेगा कि दी गई डिजिटल जानकारी पूरी तरह सटीक और प्रामाणिक है.

न्यायिक कंप्यूटर प्रणाली में एंट्री

प्रत्येक शिकायत के साथ एक निर्धारित प्रारूप में सारांश जोड़ना आवश्यक होगा. इसके बाद अदालती कर्मचारी इस डेटा को न्यायिक कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करेंगे, जिससे भविष्य में मामले की ट्रैकिंग आसान हो जाएगी.

प्रक्रिया का सरलीकरण

सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी को समन जारी करने से पहले अब ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNNS) की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, सॉफ्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्पलेट जोड़ा गया है जो ‘कॉज ऑफ एक्शन’ से संबंधित समय सीमा की गणना स्वचालित रूप से कर लेगा.

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शिकायत का ऑनलाइन निपटान

न्यायालय ने न केवल समन भेजने की प्रक्रिया को आधुनिक बनाया है, बल्कि विवादों को जल्दी सुलझाने के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी शुरू की है. अब जारी किए जाने वाले समन में इस सुविधा का स्पष्ट उल्लेख होगा और साथ ही भुगतान के लिए एक डायरेक्ट लिंक भी दिया जाएगा.

आरोपी व्यक्ति अपने सीएनआर नंबर या केस की डिटेल दर्ज करके चेक की राशि सीधे पोर्टल पर जमा कर सकता है. यदि आरोपी इस पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक भुगतान कर देता है, तो अदालत मामले को ‘कंपाउंडिंग’ के आधार पर बंद करने की अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकती है, जिससे आरोपी को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.

किस मामले में सुनाया फैसला?

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के ये निर्देश ‘संजय तुरी बनाम किशोर एस. बरकर’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुपालन में जारी किए गए हैं. शीर्ष अदालत ने चिंता जताई थी कि पूरे भारत में लाखों चेक बाउंस मामले लंबित हैं, जो न्यायिक प्रणाली पर भारी बोझ डालते हैं. डिजिटल समन और ऑनलाइन भुगतान इस बोझ को कम करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है.

कोर्ट ने दी ये चेतावनी

उच्च न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई शिकायतकर्ता फाइलिंग के दौरान गलत ईमेल या व्हाट्सएप जानकारी प्रदान करता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. ये नई पहल उत्तराखंड में न्याय प्रणाली को पेपरलेस और अधिक प्रभावी बनाने की ओर एक बड़ा कदम है. इससे न केवल समन भेजने में होने वाली देरी खत्म होगी, बल्कि चेक बाउंस जैसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा.

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