क्या अब AI इंसानों की तरह सोचने लगेगा? इन देशों में शुरू हुई AGI की रेस, जानें पूरी कहानी

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 23, 2026 11:56 PM IST

टेक्नोलॉजी की दुनिया का अगला बड़ा लक्ष्य है Artificial General Intelligence (AGI). यानी ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो इंसानों की तरह सोच सके, सीख सके और अलग-अलग परिस्थितियों में फैसले ले सके.

AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence). टेक वर्ल्ड में आज शायद AI ही एकमात्र ऐसा टर्म है, जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है. टेक्नोलॉजी से प्यार करने वाला हर व्यक्ति करीब हर दिन इससे रूबरू होता है. AI को इंसानों की जिंदगी में किसी आने वाले क्रांतिकारी बदलाव के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है. आप जिस काम को करने में आधा घंटा लगाते हैं, वो काम AI कुछ सेकेंड में पूरा कर देता है. अब टेक वर्ल्ड में AI को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. बहस इस बात को लेकर है कि क्या AI को आने वाले कुछ सालों में इस तरह डेवलप किया जा सकता है, जो इंसानों जैसी सोच रख सके?

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गूगल डीपमाइंड के CEO डेमिस हासाबिस ने हाल ही में AI को लेकर ऐसा ही स्टेटमेंट दिया. स्टैनफर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के एक इवेंट में डेमिस हासाबिस ने कहा, "शायद 2030 एक-दो साल कम या ज्यादा लग सकते हैं... लेकिन हम इंसानों जैसा सोचने वाला AI बना लेंगे. ये AGI होगा." आइए जानते हैं क्या है AGI? इससे बनाने की क्यों मची होड़? कौन-कौन से देशों में इसे लेकर चल रहा रिसर्च:-

आखिर AGI है क्या?

आज जो AI सिस्टम दुनिया में इस्तेमाल हो रहे हैं, उन्हें Artificial Narrow Intelligence (ANI) कहा जाता है. ये सिस्टम किसी एक खास काम के लिए बनाए जाते हैं. उदाहरण के लिए, कोई AI सिर्फ लैंग्वेज को ट्रांसलेट कर सकता है. कोई तस्वीरों की पहचान कर सकता है. कोई शतरंज खेलने में माहिर हो सकता है. AGI इससे बिल्कुल अलग होगी. हासाबिस का अनुमान है कि यह 2030 तक हकीकत बन सकता है. ChatGPT के CEO सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डेरियो अमोदेई भी इसी डेडलाइन की बात कर चुके हैं.

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AGI का मकसद?

इसका मकसद ऐसा सिस्टम बनाना है, जो इंसानों की तरह अलग-अलग सेक्टर में काम कर सके. अगर उसे कोई नया काम दिया जाए, तो वह बिना दोबारा प्रोग्राम किए उसे सीख सके. अपनी पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करके नई समस्याओं का समाधान खोज सके.

AGI और मौजूदा AI में क्या अंतर है?

मौजूदा AI मुख्य रूप से पैटर्न आइडेंटिफिकेशन पर बेस्ड है. इसे नए काम सीखने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा और ट्रेनिंग की जरूरत होती है. दूसरी ओर AGI में खुद सीखने और परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की ताकत होगी.

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं. अगर एक इंसान मैथ्स सीखता है, तो वह उस नॉलेज का इस्तेमाल इंजीनियरिंग, साइंस या फाइनेंस जैसे दूसरे सेक्टर में भी कर सकता है. AGI से भी यही उम्मीद की जा रही है कि वह एक सेक्टर में सीखी गई जानकारी को दूसरे सेक्टर में लागू कर सकेगी. इसे 'ट्रांसफर लर्निंग' कहा जाता है.

AGI अभी सिर्फ एक इमेजिनेशन

टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, AGI अभी सिर्फ एक इमेजिनेशन है. इसका वास्तविक विकास अभी बाकी है. हालांकि, दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियां और देश इसे हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं. माना जा रहा है कि जो देश या कंपनी सबसे पहले AGI डेवलप कर लेगी, वह टेक्नोलॉजी और आर्थिक रूप से दुनिया में बड़ी बढ़त हासिल कर सकती है.

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AGI की रेस में कौन-कौन शामिल?

  • फिलहाल AGI की दौड़ में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा माना जाता है. सबसे चर्चित नाम है OpenAI. इसने ChatGPT मॉडल डेवलप किया है. इसे नवंबर 2022 में लॉन्च किया गया था.ये मॉडल भाषा समझने, कोड लिखने और जटिल सवालों के जवाब दे सकता है.
  • Google DeepMind ने AlphaGo और AlphaFold जैसी टेक्नोलॉजी से AI की क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. AlphaFold ने प्रोटीन स्ट्रक्चर की भविष्यवाणी कर बायो रिसर्च में क्रांति ला दी है.
  • Anthropic भी AGI की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही है. इस कंपनी का Claude मॉडल लंबी बातचीत और मुश्किल एनालिसिस के लिए जाना जाता है.
  • वहीं, xAI और Meta AI भी बड़े पैमाने पर AI मॉडल और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहे हैं.

देशों के बीच भी है प्रतिस्पर्धा

  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के AI इंडेक्स के मुताबिक, अमेरिका फिलहाल AI डेवलपमेंट में सबसे आगे है. इसकी सबसे बड़ी वजह OpenAI, Google, Microsoft, Nvidia, Amazon और Meta जैसी कंपनियों की मौजूदगी है.
  • चीन भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है. Baidu, Alibaba, Tencent और DeepSeek जैसी कंपनियां बड़े AI मॉडल डेवलप कर रही हैं. चीन का टारगेट AI में ग्लोबल लीडरशिप हासिल करना है.
  • यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और भारत भी अपनी AI ताकत को मजबूत करने में जुटे हैं. भारत खासतौर पर IndiaAI Mission, डेटा सेंटर और स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.

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AGI तक पहुंचने का रास्ता?

टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि AGI की दिशा में कई तकनीकी उपलब्धियां अहम भूमिका निभा रही हैं. इनमें बड़े भाषा मॉडल (LLMs), मल्टीमॉडल AI, साइंटिफिक रिसर्च में AI का इस्तेमाल, AI एजेंट्स और विशाल AI सुपरकंप्यूटर शामिल हैं.

मल्टीमॉडल AI अब टेक्स्ट, तस्वीर, ऑडियो और वीडियो को एक साथ समझ सकती है. वहीं, AI एजेंट्स ऐसे सिस्टम हैं; जो सीमित इंसानी दखल के साथ कई फेज वाले काम पूरे कर सकते हैं.

भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी लड़ाई

AGI को लेकर उत्साह जितना अधिक है, उतनी ही चिंताएं भी हैं. एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इंसानों जैसा दिमाग रखने वाली मशीनें सुरक्षा, रोजगार और नियंत्रण से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर सकती हैं. यही वजह है कि कंपनियां AGI विकसित करने के साथ-साथ AI सुरक्षा पर भी भारी निवेश कर रही हैं.

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