
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
क्या आज के समय में किसी देश के लिए मुमकिन है कि अपने सीमा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगा दें. US बेस्ड सोशल मीडिया जायंट मेटा के ऐप्स जैसे WhatsApp, इंस्टाग्राम पूरी तरह से बैन कर दें. इससे भी बुरा, वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) यानि ग्लोबल इंटरनेट स्पेस को ही बैन कर दें. चीन, नार्थ कोरिया के बाद अब रूस, देश में कुछ ऐसा ही करने जा रहा है. रूस डिजिटल स्पेस की बाउंड्री तय करने के लिए लगातार सख्त फैसले ले रहा है. रूस ने साल के शुरूआत में ही WhatsApp को बैन कर दिया था, अब Telegram ऐप के सर्विसेज में गिल्च आने शुरू हो चुके हैं और YouTube पूरी तरह स्लो हो चुका है.
रूस अब अपनी डिजिटल स्पेस की बाउंड्री को इस तरह तैयार कर रहा है कि कोई भी बाहरी डेटा पैकेट बिना सरकारी जांच के देश के अंदर न आ सके. यह कदम रूस के सॉवरेन रनैट (Sovereign Runet) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत क्रेमलिन इंटरनेट के हर ट्रैफिक को खुद कंट्रोल करना चाहता है. इसके लिए रूस की सरकार ने किल स्विच जैसे सिस्टम पर काम शुरू किया है, जो ज़रूरत पड़ने पर पूरे देश को ग्लोबल इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर सकता है.
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फरवरी 2026 में रूस ने WhatsApp को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. इस फैसले को लेकर रूसी रेगुलेटर Roskomnadzor ने बताया कि मेटा का यह ऐप रूसी कानूनों की अनदेखी कर रहा था. अब रूस के डिजिटल स्पेस में व्हाट्सएप का इस्तेमाल करना गैरकानूनी माना जा रहा है.
रूस में Telegram को बेहद स्लो (Throttling) किया गया है. मार्च 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां टेलीग्राम की स्पीड 75% तक गिर गई है. सरकार का आरोप है कि ऐप ने आपराधिक कंटेंट हटाने में को-ऑपरेट नहीं किया, इस वजह से ऐसा किया जा रहा है.
रूस ने अपने डिजिटल स्पेस से YouTube को लगभग बाहर कर दिया है. पिछले कई महीनों से वहां यूट्यूब की स्पीड को इतना कम कर दिया गया है कि वीडियो बफर होना नामुमकिन हो गया है. इसे सॉफ्ट बैन माना जा रहा है ताकि लोग खुद ही ऐप छोड़ दें.
रूस चाहता है कि उसके नागरिक विदेशी ऐप्स छोड़कर सरकारी MAX सुपर ऐप का इस्तेमाल करें. इसे रूस का अपना नेशनल मैसेंजर कहा जा रहा है. यह ऐप पूरी तरह रूसी सरकार की निगरानी में काम करता है. इसी वजह से रूस ने YouTube, WhatsApp और Facebook जैसी 13 बड़ी साइट्स को अपने नेशनल डोमेन सिस्टम से डिलीट कर दिया है. इसका मतलब है कि अब रूस के अंदर बिना हाई-लेवल VPN के इन साइट्स को ओपन नहीं किया जा सकता.
रूसी सरकार अब एक Whitelist सिस्टम पर काम कर रही है. इसमें केवल वही वेबसाइट्स या ऐप्स चलेंगे जिन्हें सरकार से क्लीनचिट मिली होगी. यह कदम रूस के डिजिटल स्पेस को पूरी तरह एक बंद कमरे की तरह बना देगा.
रूस ने इन पाबंदियों के पीछे नेशनल सिक्योरिटी और ड्रोन अटैक का हवाला दिया है. सरकार का दावा है कि विदेशी ऐप्स का इस्तेमाल जासूसी और हमलों के नेविगेशन के लिए किया जा सकता है, इसलिए डिजिटल बाउंड्री को सील करना जरूरी है.
रूस अब उन VPN सर्विस को भी बैन कर रहा है जो इन ऐप्स को चलाने में मदद करते हैं. सरकार चाहती है कि रूसी नागरिक केवल वही जानकारी पढ़ें जो उनके डिजिटल स्पेस में सरकारी फिल्टर से होकर आई हो.
रूस ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ग्लोबल कंपनी को वहां अपना बिजनेस चलाना है, तो उसे अपना सर्वर और डेटा रूस की डिजिटल बाउंड्री के अंदर ही रखना होगा, वरना उन्हें पूरी तरह ब्लॉक कर दिया जाएगा.
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