रूस क्यों बैन कर रहा इंटरनेट? अब WhatsApp सहित इन ऐप्स पर लगाई पाबंदी

रूस अपने डिजिटल स्पेस को ग्लोबल इंटरनेट से अलग करके एक डिजिटल वेब बना रहा है. रूस फॉरेन ऐप्स (WhatsApp, YouTube) को हटाकर वह अपने नागरिकों को सरकारी MAX ऐप पर शिफ्ट कर रहा है, ताकि देश की सीमा के भीतर इंर्फोमेशन के फ्लो पर सरकार का 100% कंट्रोल हो सके.

Published date india.com Published: March 21, 2026 9:42 PM IST
Russia bans Social media app

क्या आज के समय में किसी देश के लिए मुमकिन है कि अपने सीमा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगा दें. US बेस्ड सोशल मीडिया जायंट मेटा के ऐप्स जैसे WhatsApp, इंस्टाग्राम पूरी तरह से बैन कर दें. इससे भी बुरा, वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) यानि ग्लोबल इंटरनेट स्पेस को ही बैन कर दें. चीन, नार्थ कोरिया के बाद अब रूस, देश में कुछ ऐसा ही करने जा रहा है. रूस डिजिटल स्पेस की बाउंड्री तय करने के लिए लगातार सख्त फैसले ले रहा है. रूस ने साल के शुरूआत में ही WhatsApp को बैन कर दिया था, अब Telegram ऐप के सर्विसेज में गिल्च आने शुरू हो चुके हैं और YouTube पूरी तरह स्लो हो चुका है.

डिजिटल स्पेस की बाउंड्री

रूस अब अपनी डिजिटल स्पेस की बाउंड्री को इस तरह तैयार कर रहा है कि कोई भी बाहरी डेटा पैकेट बिना सरकारी जांच के देश के अंदर न आ सके. यह कदम रूस के सॉवरेन रनैट (Sovereign Runet) प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत क्रेमलिन इंटरनेट के हर ट्रैफिक को खुद कंट्रोल करना चाहता है. इसके लिए रूस की सरकार ने किल स्विच जैसे सिस्टम पर काम शुरू किया है, जो ज़रूरत पड़ने पर पूरे देश को ग्लोबल इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर सकता है.

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WhatsApp पर पूरी तरह बैन

फरवरी 2026 में रूस ने WhatsApp को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. इस फैसले को लेकर रूसी रेगुलेटर Roskomnadzor ने बताया कि मेटा का यह ऐप रूसी कानूनों की अनदेखी कर रहा था. अब रूस के डिजिटल स्पेस में व्हाट्सएप का इस्तेमाल करना गैरकानूनी माना जा रहा है.

Telegram की थ्रॉटलिंग

रूस में Telegram को बेहद स्लो (Throttling) किया गया है. मार्च 2026 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां टेलीग्राम की स्पीड 75% तक गिर गई है. सरकार का आरोप है कि ऐप ने आपराधिक कंटेंट हटाने में को-ऑपरेट नहीं किया, इस वजह से ऐसा किया जा रहा है.

YouTube की स्पीड में भारी गिरावट

रूस ने अपने डिजिटल स्पेस से YouTube को लगभग बाहर कर दिया है. पिछले कई महीनों से वहां यूट्यूब की स्पीड को इतना कम कर दिया गया है कि वीडियो बफर होना नामुमकिन हो गया है. इसे सॉफ्ट बैन माना जा रहा है ताकि लोग खुद ही ऐप छोड़ दें.

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MAX सुपर ऐप का उदय

रूस चाहता है कि उसके नागरिक विदेशी ऐप्स छोड़कर सरकारी MAX सुपर ऐप का इस्तेमाल करें. इसे रूस का अपना नेशनल मैसेंजर कहा जा रहा है. यह ऐप पूरी तरह रूसी सरकार की निगरानी में काम करता है. इसी वजह से रूस ने YouTube, WhatsApp और Facebook जैसी 13 बड़ी साइट्स को अपने नेशनल डोमेन सिस्टम से डिलीट कर दिया है. इसका मतलब है कि अब रूस के अंदर बिना हाई-लेवल VPN के इन साइट्स को ओपन नहीं किया जा सकता.

व्हाइटलिस्ट इंटरनेट की तैयारी

रूसी सरकार अब एक Whitelist सिस्टम पर काम कर रही है. इसमें केवल वही वेबसाइट्स या ऐप्स चलेंगे जिन्हें सरकार से क्लीनचिट मिली होगी. यह कदम रूस के डिजिटल स्पेस को पूरी तरह एक बंद कमरे की तरह बना देगा.

ड्रोन अटैक और सुरक्षा का तर्क

रूस ने इन पाबंदियों के पीछे नेशनल सिक्योरिटी और ड्रोन अटैक का हवाला दिया है. सरकार का दावा है कि विदेशी ऐप्स का इस्तेमाल जासूसी और हमलों के नेविगेशन के लिए किया जा सकता है, इसलिए डिजिटल बाउंड्री को सील करना जरूरी है.

VPN पर भी नकेल

रूस अब उन VPN सर्विस को भी बैन कर रहा है जो इन ऐप्स को चलाने में मदद करते हैं. सरकार चाहती है कि रूसी नागरिक केवल वही जानकारी पढ़ें जो उनके डिजिटल स्पेस में सरकारी फिल्टर से होकर आई हो.

ग्लोबल टेक कंपनियों को अल्टीमेटम

रूस ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ग्लोबल कंपनी को वहां अपना बिजनेस चलाना है, तो उसे अपना सर्वर और डेटा रूस की डिजिटल बाउंड्री के अंदर ही रखना होगा, वरना उन्हें पूरी तरह ब्लॉक कर दिया जाएगा.

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