International Women's Day: महिलाएं अनेक कहानी एक, कड़ी मेहनत से पाई नौकरी क्यों बोझ बनी, कहां पहुंचकर थम जाती हैं औरतें
Farha Fatima | Mar 8, 2025, 7:57 AM IST
International Women's Day: स्कूल, कॉलेज जाने से पहले घरों के काम में 'मां का हाथ' बटाने की टर्म से ही लड़कियां ये सीखती हैं कि ये मां का काम है. जबकि वो मां का नहीं है, सबका है. खासकर वहां तो बिलकुल नहीं जहां मां भी पिता की तरह नौकरी करती है. पैसा कमाती है. परिवार को आर्थिक मजबूती मां-पिता दोनों ने दी तो, घर का काम बस मां का कैसे रह गया. जो कहते हैं लड़कियां नौकरी में, बिजनेस में पीछे रह जाती हैं, उन्हें ये पढ़ना, समझना चाहिए मां बनने के बाद औरतों की ज़िंदगी का दायरा कितना सीमित हो जाता है. ये दौर कुछ हफ्तों महीनों या सालों का नहीं होता. ता उम्र उनके मन में गहरी पीड़ा रहती है....




