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5 भूतिया जगहें जहां रात में जाने से डरते हैं लोग
अग्रसेन की बावली दिल्ली में स्थित है. यहां का शांत और सन्नाटे वाला वातावरण सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है. यह बावली एक संरक्षित स्मारक है और दिल्ली के पर्यटक स्थलों में से एक है. अग्रसेन की बावली सबसे पहले कब बनाई गई थी इसके बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिलती है.
Most Haunted Places In India: भारत में कई डरावनी जगहे हैं जिनके बारे में सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. इन जगहों के रहस्य भी अजब-गजब है. खास बात है कि इसके बाद भी टूरिस्ट इन जगहों की सैर के लिए जाते हैं, और यहां घूमते हैं. ये ऐसी जगहें हैं जहां विदेशी टूरिस्ट भी सैर के लिए आते हैं. हम जानते हैं कि जिस तरह से लोगों को पहाड़, नदियां, झरने, वादियां, ऐतिहासिक स्मारक, किले और पुरानी जगहें देखने का शौक होता है, उसी तरह डरावनी जगहों की सैर का भी अपना रोमांच होता है. अपने अनोखे रहस्य के कारण इन किलों को भूतिया किला भी कहा जाता है. आइए ऐसे ही पांच डरावनी जगहों के बारे में जानते हैं, जहां टूरिस्ट शाम को जाने से डरते हैं.
भानगढ़ का किला
भानगढ़ का किला राजस्थान में है. यह इतनी रहस्यमय जगह है कि यहां के बारे में आपको कई तरह की कहानियां और किस्से मिल जाएंगे. इस जगह पर किसी को भी सूरज ढलने के बाद नहीं जाने दिया जाता. यहां के बारे में कहा जाता है कि शाम को यहां अजीब तरह के अनुभव होते हैं और आत्माओं का आभास होता है. यहां तक कहा जाता है कि यहां शाम को रुकने वाले की मौत हो जाती है. यही वजह है कि भानगढ़ का किला सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक ही खुलता है. इसके बाद इस किले में प्रवेश प्रतिबंधित है. अगर आप इस किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो तय वक्त के बीच ही जाएं.

भानगढ़ का किला दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां आप सड़क मार्ग से बेहद आसानी से जा सकते हैं. अगर आप ट्रेन के जरिए भानगढ़ किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो अलवर उतर सकते हैं और उसके बाद यहां जाने के लिए टैक्सी ले सकते हैं. इस किले को घूमने की प्लानिंग कर रहे लोग इस बात को जान लें कि यहां सूर्यास्त के बाद आपको घूमने नहीं दिया जाएगा इसलिए उससे पहले ही यह किला घूम लें.
शनिवार वाड़ा
शनिवार वाड़ा पुणे में है. यह बेहद रहस्यमय और डरावनी जगह है. कहा जाता है कि इस किले में 13 साल के नारायण राव नाम के राजकुमार की हत्या कर दी गई थी. तब से उसकी आत्मा किले में भटक रही है. रात में यहां बच्चे के चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती हैं. इस किले का निर्माण मराठा-पेशवा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले बाजीराव पेशवा ने करवाया था. यह किला साल 1732 में बनकर तैयार हुआ था.
इस महल की नींव शनिवार को रखी गई थी तभी इसे ‘शनिवार वाड़ा’ कहते हैं. अब यह किला खंडहर हो चुका है और आप यहां घूम सकते हैं और यहां के सुकून और सन्नाटे को महसूस कर सकते हैं.
अग्रसेन की बावली
अग्रसेन की बावली दिल्ली में स्थित है. यहां का शांत और सन्नाटे वाला वातावरण सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है. यह बावली एक संरक्षित स्मारक है और दिल्ली के पर्यटक स्थलों में से एक है. अग्रसेन की बावली सबसे पहले कब बनाई गई थी इसके बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिलती है. कहा जाता है कि इस बावली को महाराजा अग्रसेन नामक अग्रोहा के राजा ने बनवाया था. जिसके नाम पर इस बावली का नाम पड़ा. 14 वीं शताब्दी में अग्रवाल समुदाय द्वारा इसे फिर से बनाया गया. यह बावड़ी न केवल एक जलाशय के रूप में बल्कि सामुदायिक स्थान के तौर पर निर्मित की गई थी. माना जाता है कि उस वक्त की महिलाएं इस कुएं पर इकट्ठा होती थीं और यहां के शांत वातावरण में आराम कर गर्मी से बचती थीं. इस बावली की लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है.
जतिंगा घाटी और रामोजी फिल्म सिटी
इसी तरह से असम में जतिंगा घाटी और रामोजी फिल्मसिटी हैदराबाद भी डरावनी जगहों में शामिल है. जतिंगा घाटी में रहस्यमय रूप से पक्षी मर जाते हैं और क्यों मरते हैं किसी को भी नहीं पता है. ये प्रवासी पक्षी होते हैं और यहां मरे पड़े मिलते हैं. इस जगह को भूतिया जगह कहा जाता है. इसी तरह से रामोजी फिल्मसिटी को भी भूतिया माना जाता है. यहां कई बार लोगों को विचित्र छाया, उंगलियों के निशान और दरवाजों के अपने आप खुलने-बंद होने की आवाजें आती हैं.
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