
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास'में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 9 सालों से पत्रकारिता में ... और पढ़ें
Jammu and Kashmir Amarnath Yatra 2022: अमरनाथ यात्रा के लिए सोमवार से पंजीकरण शुरू हो गया है. यह यात्रा 30 जून से शुरू होगी. 43 दिन की अमरनाथ यात्रा का समापन परंपरा के अनुरूप रक्षा बंधन के दिन होगा. अमरनाथ, जम्मू-कश्मीर में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. कोरोना महामारी के कारण दो साल यानी 2020 और 2021 में सांकेतिक अमरनाथ यात्रा को ही अनुमति दी गई थी.
इस दौरान यात्रा तो नहीं हुई, लेकिन वैदिक परंपरागत विधि से भोलेनाथ की पूजा जारी थी. इस बार अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खासा आकर्षण है. आइए जानते हैं कि इस यात्रा के लिए पंजीकरण कैसे करें
पहला चरण: श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर shriamarnathjishrine.com पर जाएं.
दूसरा चरण: यहां होमपेज पर व्हाट्स न्यू सेक्शन में जाएं और “ऑनलाइन रजिस्टर करने के लिए यहां क्लिक करें” पर क्लिक करें.
तीसरा चरण: इसके बाद नया पेज खुलेगा जहां आपको सीधे पंजीकरण लिंक मिलेगा.
चौथा चरण: लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना विवरण दर्ज करें.
पांचवां चरण: दिये गए सभी निर्देशों के हिसाब से आगे बढ़ें. इस तरह आपका पंजीकरण पूरा हो जाएगा.
श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए ऑफलाइन पंजीरण भी करा सकते हैं. यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर बैंक की 446 शाखाओं, पीएनबी बैंक, यस बैंक और देश भर में एसबीआई बैंक की 100 शाखाओं में पंजीकरण शुरू हो गया है. तीर्थयात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले एफआरआईडी की मदद से श्राइन बोर्ड तीर्थयात्रियों को ट्रैक कर सकता है. इस साल टट्टू संचालकों के लिए बीमा कवरेज को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है.
रजिस्ट्रेशन के लिए आपको आधार कार्ड, चार पासपोर्ट साइज फोटो और हेल्थ सर्टिफिकेट की जरूरत होगी. इस यात्रा पर 13 साल से कम उम्र के बच्चे और 75 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग नहीं जा सकते हैं.
अमरनाथ हिंदुओं (Hindus) का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है. यहां प्राकृतिक शिवलिंग बनता है और हर साल देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ की यात्रा करते हैं. अमरनाथ, श्रीनगर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. इस पवित्र स्थल के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को मुश्किल से भरा सफर करना होता है. सरकार की तरफ से श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम किये जाते हैं. इस धार्मिक यात्रा की चुनौती को देखते हुए श्रद्धालुओं का पूरा मेडिकल चेकअप होता है.
अमरनाथ (Amarnath Yatra) की यात्रा महाभारत काल से ही की जा रही है. कल्हण की राजतरंगिनी तरंग द्वितीय में कश्मीर के राजा सामदीमत के अमरनाथ यात्रा के प्रमाण मिलते हैं. सामदीमत भगवान शिव के भक्त थे और पहलगाम के वनों में स्थित बर्फ के शिवलिंग की पूजा करने जाते थे.
14वीं शताब्दी के मध्य में करीब 300 सालों तक अमरनाथ की यात्रा बाधित भी रही. स्वामी विवेकानंद ने भी 8 अगस्त 1898 में अमरनाथ की यात्रा की थी. यह भगवान शिव का सबसे पवित्र स्थल है और यहां स्थित गुफा में बाबा शिव ने अपनी पत्नी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था और कई वर्ष रहकर तपस्या की थी. भगवान शिव के पांच प्रमुख स्थल- कैलाश पर्वत, अमरनाथ, केदारनाथ, काशी और पशुपतिनाथ है. इनमें से पशुपतिनाथ नेपाल में स्थित है.
पौराणिक कथा है कि भगवान शिव जब माता पार्वती को कथा सुना रहें थे उस वक्त उनके अलावा एक कबूतर का जोड़ा भी वहां मौजूद था. जो कथा सुनकर अमर हो गया. कहा जाता है कि आज भी गुफा में श्रद्धालुओं को कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है. कहा जाता है कि मां पार्वती को कथा सुनाने के दौरान भगवान शइव ने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, माथे के चंदन को चंदनवाड़ी में उतारा और गले के शेषनाग को शेषनाग स्थल पर छोड़ा था. ये सभी स्थान अमरनाथ यात्रा के दौरान रास्ते में दिखाई देते हैं.
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