Bhangarh Fort Story: कैसे पहुंचे भानगढ़? शाम होते ही क्यों नहीं जाता कोई इस किले के अंदर?

भानगढ़ किले को लेकर कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं. यह किला भूतिया है और इसे किले में रात के वक्त प्रवेश प्रतिबंधित है.

Published date india.com Updated: January 15, 2024 12:02 PM IST
Bhangarh Fort Story: कैसे पहुंचे भानगढ़? शाम होते ही क्यों नहीं जाता कोई इस किले के अंदर?

How to Reach Bhangarh Fort Rajasthan: भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है. यहां का नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर में है. जयपुर से फिर आपको भानगढ़ के लिए करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. यह दूरी टूरिस्ट टैक्सी और बस के जरिए तय कर सकते हैं. अगर टूरिस्ट दिल्ली से भानगढ़ जा रहे हैं, तो ट्रेन और प्लेन के जरिए जा सकते हैं. भानगढ़ का करीबी रेलवे स्टेशन भान कारी रेलवे स्टेशन और दौसा रेलवे स्टेशन है. यहां से इस हॉन्टेड प्लेस पर पहुंचने के लिए करीब 20-30 किलोमीटर का सफर और तय करना होता है. आप अगर बस के जरिए भानगढ़ जा रहे हैं तो देश की प्रमुख जगहों से यहां डायरेक्ट बस के जरिए जा सकते हैं. दिल्ली से भानगढ़ की दूरी करीब 300 किलोमीटर है. आइए इस किले का रहस्य जानते हैं.

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सूरज ढलने के बाद भानगढ़ किले में नहीं जाते टूरिस्ट

सूरज ढलने के बाद कोई भी टूरिस्ट भानगढ़ किले में नहीं जाता है. इसकी वजह है कि यह किला भूतिया किला है. यहां पैरानॉर्मल एक्टिविटी होती है. निगेटिव एनर्जी के कारण को भी यात्री शाम होने के बाद यहां प्रवेश नहीं करता और न ही किले के अंदर घूमता है. आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने भी शाम को समय किले के भीतर प्रवेश को प्रतिबंधित कर रखा है. अगर आप इस किले को घूमने के लिए जा रहे हैं, तो सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक इसे घूम सकते हैं. यह किला अब खंडहर हो चुका है और इसे देखने के लिए काफी तादाद में टूरिस्ट पहुंचते हैं.

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किसने बनाया था भानगढ़ किला? क्या है यहां की कहानी

भानगढ़ किला 17 वीं शताब्दी में बना हुआ है. यह किला प्राचीन कला का एक नमूना है. भानगढ़ किले को लेकर कहा जाता है कि आमेर के राजा भगवत दास ने इसे अपने छोटे बेटे माधो सिंह प्रथम के लिए 1573 में बनवाया था. ऐसी भी मान्यता है कि इस जगह को एक ऋषि ने शाप दिया था. ऐसा भी कहा जाता है कि अगर आप भानगढ़ के घरों की दीवारों के पास कान लगाएंगे तो आपको आत्माओं की आवाज सुनाई देगी. इस किले को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि जिस जगह पर यह किला बना हुआ है वो जगह गुरू बालूनाथ नामक तपस्वी की थी. जब यह किला बन रहा था तो तपस्वी ने कहा था कि इस किले की छाया उसके घर पर न पड़े लेकिन धीरे-धीरे इसकी अनदेखी होने लगी और यह किला तबाह हो गया. ऐसा भी कहा जाता है कि इस किले के सर्वनाश का कारण यहां की राजकुमारी रत्नावती थी.राजकुमारी के प्यार में पड़े एक तांत्रिक ने साजिश रचकर राजकुमारी को हासिल करना चाहा था लेकिन उसको मौत के घाट उतार दिया गया जिसके बाद यह किला भी खंडहर हो गया.

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