Ganesh Chaturthi 2023: ये है भगवान गणेश का चमत्कारी मंदिर जहां बढ़ रहा है मूर्ति का आकार!

यह चमत्कारी गणेश मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तुर जिले में है. मंदिर का नाम कनिपकम मंदिर है. इस मंदिर को पानी के देवता का मंदिर भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यहां गणपति की प्रतिमा का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

Published date india.com Published: September 1, 2023 2:38 PM IST
Ganesh Chaturthi 2023: ये है भगवान गणेश का चमत्कारी मंदिर जहां बढ़ रहा है मूर्ति का आकार!

Ganesh Chaturthi 2023: इस साल गणेश चतुर्थी मंगलवार 19 सितंबर को शुरू होगी और 28 सितंबर को गणपति की मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा. इस गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2023) आप भगवान गणेश के एक ऐसे मंदिर में दर्शन कर सकते हैं, जहां गणपति की मूर्ति का आकार लगातार बढ़ रहा है. यह चमत्कारी गणेश मंदिर दक्षिण भारत में है और देश के कोने-कोने से यहां श्रद्धालु आते हैं. आइए दक्षिण भारत में स्थित इस चमत्कारी गणेश मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या है इस गणेश मंदिर का नाम?

यह चमत्कारी गणेश मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तुर जिले में है. मंदिर का नाम कनिपकम मंदिर है. इस मंदिर को पानी के देवता का मंदिर भी कहा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यहां गणपति की प्रतिमा का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है. देशभर से श्रद्धालु इस मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं.

11वीं शताब्दी का है यह गणेश मंदिर

यह गणेश मंदिर काफी पुराना है. मंदिर बाहुदा नदी के बीच में बना है. इस मंदिर के जल को पवित्र माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस जल से कई तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं.  इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा कुलोठुन्गा चोल प्रथम ने करवाया था. फिर विजयनगर वंश के राजा ने 1336 में मंदिर को बड़ा बनाने का काम किया. यहां गणेश चतुर्थी से ब्रह्मोत्सव शुरू होता है. यह उत्सव इस मंदिर में 20 दिनों तक मनाया जाता है. इस दौरान यहां रथ यात्रा निकाली जाती है. ऐसी लोक कथा है कि काफी वक्त पहले यहां तीन भाई रहते थे. जिनमें एक अंधा, दूसरा गूंगा और तीसरा बहरा था. तीनों अपनी खेती के लिए कुआं खोद रहे थे कि उन्हें एक पत्थर दिखाई दिया. कुएं को और गहरा खोदने के लिए जैसे ही पत्थर को हटाया, वहां से खून की धारा निकलने लगी. जिससे कुआं भर गया. कहा जाता है कि तभी वहां गणेश जी की स्वयंभू प्रतिमा दिखाई दी. जिसके दर्शन से ही तीन भाई ठीक हो गए. इसके बाद से यहां मंदिर बनाया गया. यह मंदिर तिरुपति बस स्टेशन से केवल 72 किमी पर है. इस मंदिर के नजदीक में तिरुपति रेलवे स्टेशन है और यह मंदिर से केवल 70 किमी की दुरी पर है. यहां का नजदीकी हवाई अड्डा तिरुपति हवाईअड्डा है जहां से मंदिर की दूरी करीब 86 किमी है.

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