Golconda Fort Telangana: इस बार आप गोलकुंडा का किला घूम सकते हैं. यह किला तेलंगाना में स्थित है और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है. हालांकि अब यह किला अपने पुरातन स्वरूप में मौजूद नहीं है और यहां खंडहर हैं, लेकिन फिर भी सैलानी इसे देखने के लिए जाते हैं और यहां के इतिहास से रूबरू होते हैं. वैसे भी भारत में कई प्राचीन किले हैं, जिन्हें देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं. ऐसा ही एक किला यह भी है, जो 400 से भी ज्यादा साल पुराना है. आइये इस किले के बारे में जानते हैं.
यह किला मराठा साम्राज्य के वक्त में बना. बताया जाता है कि इस किले का निर्माण सबसे पहले महाराजा वारंगल ने 14वीं शताब्दी में करवाया था. बाद में रानी रुद्रमा देवी और उनके पिताजी प्रतापरुद्र ने किले को सुदृढ़ीकरण करके इसका पुनर्निर्माण करवाया. यह किला समुद्र तल से 480 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है. काकतिया राजवंश के बाद में किले पर मुसुनुरी नायक ने हमला करके अपना आधिपत्य जमाया था. 1512 ई. के वक्त से कुतुबशाही राजाओं ने अपना अधिकार स्थापित करके किले का नाम मुहम्मदनगर कर दिया था.

इस किले के निर्माण को लेकर कहा जाता है कि एक चरवाहे लड़के को पहाड़ी पर एक मूर्ति मिली. जब तत्कालीन शासक काकतिया को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने इसे पवित्र स्थान मानकर चारों ओर मिट्टी का एक किला बनवा दिया. जो अब गोलकुंडा किला कहलाता है. इस किले में कुल आठ दरवाजें हैं. फतेह दरवाजा किले का मुख्य द्वार है. यह खूबसूरत किले की भव्यता को आप आज भी देख सकते हैं. इस किले में एक रहस्यमयी सुरंग है. जो महल के बाहरी भाग तक ले जाती है. कहा जाता है की संकट के वक्त शाही परिवार इसी सुंरग का इस्तेमाल करता था. हालांकि वर्तमान में किले के खंडहर होने के कारण यह सुरंग दिखाई नहीं देती है.
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