अगर आप किसी भूतिया किले को देखने के लिए जाना चाहते हैं, तो भानगढ़ किला जा सकते हैं. इस किले में शाम छह बजे बाद कोई नहीं जा सकता है. ऐसा कहा जाता है कि भानगढ़ किले के भीतर पैरानॉर्मल एक्टिविटी होती है. यह भी दावा किया जाता है कि यहां शाम होने के बाद चिखने और चिल्लाने की आवाजें आती हैं. यह भूतिया किला दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर दूर है. आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने भी सूरज ढलने के बाद इस किले में प्रवेश बैन कर रखा है. हालांकि यह किला भूतिया है, लेकिन इसे देखने के लिए बड़ी तादाद में टूरिस्ट आते हैं.
17वीं शताब्दी का है भानगढ़ किला
भानगढ़ किला 17 वीं शताब्दी का है. यह किला प्राचीन कला का नमूना है. अब यह किला खंडहर हो चुका है और टूरिस्ट इस किले की कहानियों को जानने और इसे घूमने के लिए यहां जाते हैं. इतिहास बताता है कि आमेर के राजा भगवत दास ने इसे अपने छोटे बेटे माधो सिंह प्रथम के लिए 1573 में बनवाया था. इस किले को अब टूरिस्ट टिकट लेकर घूम सकते हैं और शाम होते ही किले से बाहर निकलना होता है.
यह किला राजस्थान के रणथंभौर और जयपुर के बीच अलवर में है. पैरानॉर्मल एक्टिविटी होने के कारण इस किले को मोस्ट हॉन्टेड प्लेस माना जाता है. इस किले के भूतिया होने को लेकर कई कहानियां जु़ड़ी हैं जो बेहद डरावनी हैं. कुछ लोगों का कहना है कि रात को इस किले के अंदर से लोगों के चीखने और चिल्लाने की आवाजें आती हैं.
इस किले को एक तांत्रिक ने दिया था श्राप
ऐसा कहा जाता है कि इस किले के निर्माण से पहले माधो सिंह ने एक तपस्वी से अनुमति मांगी. उस तांत्रिक ने शर्त रखी कि किले की छाया कभी भी उसके कुटिया पर नहीं पड़नी चाहिए. लेकिन इस शर्त को अनदेखा कर मजबूत दीवारों वाला यह किला बनाया गया और इसकी छाया उस तांत्रिक के कुटिया पर पड़ गई. इसके बाद उसने क्रोधित होकर पूरे भानगढ़ को श्राप दे दिया. कहा जाता है कि इसके बाद यहां भयंकर युद्ध हुआ और बहुत से लोग मारे गए और धीरे-धीरे यह जगह शापित हो गई और यहां उन मृतकों की आत्माएं भटकने लगी. यह भी कहा जाता है कि वह तांत्रिक यहां की राजकुमारी रत्नावती के प्यार में पड़ गया था और उसने उसे साजिश से हासिल करना चाहा, जिसका खुलासा होने पर उसकी हत्या कर दी.
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