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2024 में जरूर घूमें भारत की ये 4 भूतिया जगहें, विदेशों से यहां आते हैं टूरिस्ट
देश में कई रहस्यमय जगहें हैं जिन्हें देखने के लिए देश और विदेश से टूरिस्ट आते हैं. इन जगहों की अपनी ही कहानियां हैं और टूरिस्टों के बीच ये जगहें पॉपुलर हैं. आप भी इस साल ऐसी ही चार रहस्यमय जगहों को देखने के लिए जा सकते हैं.
2024 की शुरुआत हो चुकी है. इस साल आप भूतिया जगहों की सैर कर सकते हैं. कई टूरिस्ट ऐसे होते हैं, जिन्हें रहस्यमय जगहों को देखने और घूमने का शौक होता है. भारत में कई रहस्यमय जगहें हैं जहां की सैर के लिए विदेशी टूरिस्ट तक आते हैं. इन सारी जगहों की अपनी कहानी है और टूरिस्टों के बीच ये जगहें लोकप्रिय हैं. इन रहस्यमय जगहों पर टूरिस्ट शाम होने के बाद नहीं जाते हैं, उससे पहले ही इन जगहों की सैर कर लौट आते हैं. यहां हम आपको चार ऐसी ही भूतिया जगहों के बारे में बता रहे हैं जहां आप इस साल घूम सकते हैं.
भानगढ़ का किला
आप इस साल भानगढ़ का किला घूम सकते हैं. यह किला राजस्थान में है. इस जगह पर किसी को भी सूरज ढलने के बाद नहीं जाने दिया जाता. यहां के बारे में कहा जाता है कि शाम को यहां अजीब तरह के अनुभव होते हैं और आत्माओं का आभास होता है. यहां तक कहा जाता है कि यहां शाम को रुकने वाले की मौत हो जाती है. यही वजह है कि भानगढ़ का किला सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक ही खुलता है. इसके बाद इस किले में प्रवेश प्रतिबंधित है. अगर आप इस किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो तय वक्त के बीच ही जाएं.
शनिवार वाड़ा
शनिवार वाड़ा पुणे में है. यह बेहद रहस्यमय और डरावनी जगह है. कहा जाता है कि इस किले में 13 साल के नारायण राव नाम के राजकुमार की हत्या कर दी गई थी. तब से उसकी आत्मा किले में भटक रही है. रात में यहां बच्चे के चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती हैं. इस किले का निर्माण मराठा-पेशवा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले बाजीराव पेशवा ने करवाया था. यह किला साल 1732 में बनकर तैयार हुआ था.
इस महल की नींव शनिवार को रखी गई थी तभी इसे ‘शनिवार वाड़ा’ कहते हैं. अब यह किला खंडहर हो चुका है.
अग्रसेन की बावली और जतिगां घाटी
अग्रसेन की बावली दिल्ली में स्थित है. यहां का शांत और सन्नाटे वाला वातावरण सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है. यह बावली एक संरक्षित स्मारक है और दिल्ली के पर्यटक स्थलों में से एक है. अग्रसेन की बावली सबसे पहले कब बनाई गई थी इसके बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिलती है. कहा जाता है कि इस बावली को महाराजा अग्रसेन नामक अग्रोहा के राजा ने बनवाया था. जिसके नाम पर इस बावली का नाम पड़ा. 14 वीं शताब्दी में अग्रवाल समुदाय द्वारा इसे फिर से बनाया गया. यह बावड़ी न केवल एक जलाशय के रूप में बल्कि सामुदायिक स्थान के तौर पर निर्मित की गई थी. इसी तरह से असम में जतिंगा घाटी है जिसे रहस्यमय माना जाता है. यहां सितंबर में हर अमावस को हजारों की संख्या में अपने आप पक्षी मर जाते हैं जो रहस्य का विषय है.
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