सावन में करिए काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन, दिल्ली से दूरी 863 किमी

मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका है. इस नगरी का निर्माण गंगा, वरुणा और अस्सी घाट के मिलन से हुआ है.

Published date india.com Published: July 4, 2023 3:55 PM IST
सावन में करिए काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन, दिल्ली से दूरी 863 किमी

सावन शुरू हो गया है. शिवजी की आराधना के इस महापर्व में आप काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन जरूर करिए. दिल्ली से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी करीब 863 किमी है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव काशी में अनादिकाल से रहते हैं. वैसे भी काशी भारत के सबसे प्राचीन और आध्यात्मिक शहरों में शामिल है. यह धर्म नगरी के नाम से मशहूर है. स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, काशी भगवान शिव और माता पार्वती का आदिस्थान है. मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका है. इस नगरी का निर्माण गंगा, वरुणा और अस्सी घाट के मिलन से हुआ है.

धार्मिक कथा के मुताबिक, एक बार देवताओं ने ब्रह्मा और विष्णु जी से पूछा कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ कौन है? यह सुनकर ब्रह्मा और विष्णु जी में श्रेष्ठता साबित करने की होड़ लग गई. कहा जाता है कि इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु जी और सभी देवता कैलाश पर्वत पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान शिव से पूछा कि ब्रह्मांड में सबसे श्रेष्ठ कौन हैं? यह सुनकर भगवान शिव जी के शरीर से ज्योति कुञ्ज निकली और इसके अंतिम छोर का पता लगाने वाले को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने का निर्णय हुआ. इसके बाद ब्रह्मा जी और शिव जी ज्योति के छोर का पता लगाने के लिए निकल पड़े. वापस लौटने के बाद भगवान विष्णु ने शिव जी से कहा कि ज्योति अनंद है और इसका कोई छोर नहीं है. वहीं, ब्रम्हा जी ने शिव जी से झूठ बोलते हुए कहा कि वो ज्योति के अंतिम छोर तक पहुंच गये थे. यह सुनकर शिव जी ने विष्णु जी को श्रेष्ठ घोषित कर दिया.

जिससे ब्रह्मा जी क्रोधित हो उठें और शिव जी के प्रति अपमान जनक शब्द कहे. मान्यता है कि ब्रह्मा जी के मुंह से अपमान जनक शब्दों को सुनकर शिव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव की उत्पत्ति हुई. जिसने ब्रम्हा जी के चौथे मुख को धड़ से अलग कर दिया. जिसके बाद ब्रह्मा जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने भगवान शिव जी से क्षमा मांगी. मान्यता है कि उस ज्योति स्तंभ से पृथ्वी के भीतर जहां भी भगवान शिव का दिव्य प्रकाश निकला, वो 12 ज्योर्तिलिंग कहलाये. काशी विश्वनाथ मंदिर भी इन्हीं ज्योर्तिलिंगो में से एक है.

कैसे पहुंचे काशी विश्वनाथ मंदिर?

काशी विश्वनाथ मंदिर यात्री बस, ट्रेन और हवाई जहाज से पहुंच सकते हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन काशी, वाराणसी सिटी और वाराणसी जंक्शन है. जहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी सिर्फ 3-4 किलोमीटर है. इन  रेलवे स्टेशनों के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, बंगलुरू, देहरादून, मुंबई, डिब्रूगढ़ और अहमदाबाद से डायरेक्ट ट्रेन है. काशी विश्वनाथ मंदिर का करीबी एयरपोर्ट बाबतपुर में स्थित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. जहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी सिर्फ 25 किलोमीटर है.

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