ये हैं देश के 2 रहस्यमय किले जिनकी कहानी खौफनाक और डरावनी है, फिर भी सैलानी घूमते हैं यहां

Mysterious Forts of the country: भारत में कई किले बेहद रहस्यमय हैं, लेकिन फिर भी सैलानी यहां जाते हैं और इनके बारे में जानना चाहते हैं. इन किलों की कहानी खौफनाक है और डरावनी भी. बेहद पुराने ये किले हमेशा से ही सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं.
Published date india.com Updated: October 28, 2022 4:49 PM IST
ये हैं देश के 2 रहस्यमय किले जिनकी कहानी खौफनाक और डरावनी है, फिर भी सैलानी घूमते हैं यहां

Mysterious Forts of the country: भारत में कई किले बेहद रहस्यमय हैं, लेकिन फिर भी सैलानी यहां जाते हैं और इनके बारे में जानना चाहते हैं. इन किलों की कहानी खौफनाक है और डरावनी भी. बेहद पुराने ये किले हमेशा से ही सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं. इनमें से एक किले में तो शाम ढलते ही जाना भी मना है. आइये ऐसे ही 2 पॉपुलर और रहस्यमय किलों के बारे में जानते हैं.

भानगढ़ किला राजस्थान ( Bhangarh Fort Rajasthan)

भानगढ़ का किला सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक खुलता है. इसके बाद इस किले में प्रवेश प्रतिबंधित है. अगर आप इस किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो तय वक्त के बीच ही जाएं. यह किला दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां आप सड़क मार्ग से बेहद आसानी से जा सकते हैं. इस किले के बारे में लोगों का मानना है कि यह भूतिया किला है. यही वजह है कि जनमानस में भी इसे लेकर कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं. इस किले को पैरानॉर्मल एक्टिविटी का केंद्र माना जाता है.आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने भी यहां रात में जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है.

गोलकुंडा किला ( Golconda Fort)

तेलंगाना में स्थित गोलकुंडा किले को देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं. यह कई सौ साल पुराना किला है. अब खंडहर हो चुका है लेकिन इसकी खूबसूरती टूरिस्टों को अभी भी मंत्रमुग्ध कर देती है. इस किले का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था. सैलानियों के बीच यह किला काफी लोकप्रिय है.यह किला समुद्र तल से 480 फीट की ऊंचाई पर बना है. अब किला अपने पुरातन स्वरूप में मौजूद नहीं है और यहां खंडहर हैं, लेकिन फिर भी सैलानी इसे देखने के लिए जाते हैं. यह किला मराठा साम्राज्य के वक्त में बना. बताया जाता है कि इस किले का निर्माण सबसे पहले महाराजा वारंगल ने 14वीं शताब्दी में करवाया था. बाद में रानी रुद्रमा देवी और उनके पिताजी प्रतापरुद्र ने किले को सुदृढ़ीकरण करके इसका पुनर्निर्माण करवाया. यह किला भी अपने आप में रहस्य को समेटे हुए है.

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