Mysterious Forts: घूमिये देश के ये 3 रहस्यमय किले जिन्हें देखने दूर-दूर से आते हैं टूरिस्ट

इन किलों की कहानी डरावनी और खौफनाक है, जिसे लेकर पर्यटकों में भी काफी रुचि रहती है. अपनी कहानियों और रहस्य के कारण ये किले सदा से ही पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहे हैं.

Published date india.com Published: January 10, 2023 9:38 AM IST
Mysterious Forts: घूमिये देश के ये 3 रहस्यमय किले जिन्हें देखने दूर-दूर से आते हैं टूरिस्ट

Mysterious Forts of the country: देश में कई रहस्यमय किले हैं जहां दूर-दूर से सैलानी आते हैं. ये किले काफी प्राचीन हैं और अपने साथ पुरातन इतिहास को समेटे हुए हैं. इन किलों की कहानी डरावनी और खौफनाक है, जिसे लेकर पर्यटकों में भी काफी रुचि रहती है. अपनी कहानियों और रहस्य के कारण ये किले सदा से ही पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहे हैं.  इनमें से कई किलों में पैरानॉर्मल एक्टिविटी भी होती है, जिस वजह से शाम को यहां जाने पर प्रतिबंध है. आइये ऐसे ही रहस्यमय किलों के बारे में जानते हैं

गोलकुंडा किला

तेलंगाना में स्थित गोलकुंडा किले को देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं. यह कई सौ साल पुराना किला है. अब खंडहर हो चुका है लेकिन इसकी खूबसूरती टूरिस्टों को अभी भी मंत्रमुग्ध कर देती है. इस किले का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था. सैलानियों के बीच यह किला काफी लोकप्रिय है.यह किला समुद्र तल से 480 फीट की ऊंचाई पर बना है. अब किला अपने पुरातन स्वरूप में मौजूद नहीं है और यहां खंडहर हैं, लेकिन फिर भी सैलानी इसे देखने के लिए जाते हैं. यह किला मराठा साम्राज्य के वक्त में बना. बताया जाता है कि इस किले का निर्माण सबसे पहले महाराजा वारंगल ने 14वीं शताब्दी में करवाया था. बाद में रानी रुद्रमा देवी और उनके पिताजी प्रतापरुद्र ने किले को सुदृढ़ीकरण करके इसका पुनर्निर्माण करवाया. यह किला भी अपने आप में रहस्य को समेटे हुए है.

शनिवार वाड़ा

शनिवार वाड़ा महाराष्ट्र के पुणे शहर के मध्य में स्थित है. इस प्राचीन किले का निर्माण 18वीं शताब्दी में किया गया था. पेशवा बाजी राव प्रथम ने 10 जनवरी 1730 को इस किले की नींव रखी थी. साल 1732 में यह किला बनकर तैयार हुआ था. बताया जाता है कि इस महल की नींव शनिवार के दिन रखी गई थी जिस वजह से इसे ‘शनिवार वाड़ा’ नाम दिया गया. उस वक्त इस महल को बनाने में करीब 16 हजार रुपये खर्च हुए थे. इतिहास बताता है कि तब इस महल में करीब 1000 लोग रहते थे. यह आलीशान महल पेशवाओं का था. करीब 85 साल तक यह महल पेशवाओं के अधिकार में रहा था. इसके बाद साल 1818 ईस्वी में इस महल पर अंग्रजों ने अपना अधिकार जमा लिया. जिसके बाद भारत की आजादी तक इस महल पर अंग्रेजों का कब्जा रहा.

भानगढ़ किला राजस्थान 

भानगढ़ का किला सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक खुलता है. इसके बाद इस किले में प्रवेश प्रतिबंधित है. अगर आप इस किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो तय वक्त के बीच ही जाएं. यह किला दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां आप सड़क मार्ग से बेहद आसानी से जा सकते हैं. इस किले के बारे में लोगों का मानना है कि यह भूतिया किला है. यही वजह है कि जनमानस में भी इसे लेकर कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं. इस किले को पैरानॉर्मल एक्टिविटी का केंद्र माना जाता है.आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने भी यहां रात में जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है.

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