
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
दिसंबर का आधा महीना बीत चुका है (आज 16 दिसंबर है), लेकिन कांगड़ा घाटी के सिर का ताज कहे जाने वाली धौलाधार की पहाड़ियां इस बार सूनी नजर आ रही हैं. अमूमन इस वक्त तक ये विशाल पर्वत शृंखलाएं बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेती थीं, जिससे पूरा कांगड़ा चमक उठता था. लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल अलग है. धौलाधार की चोटियां काली और पथरीली दिखाई दे रही हैं, जैसे वे किसी के इंतजार में हों. स्थानीय बुजुर्ग और पर्यावरणविद हैरान हैं कि दिसंबर के मध्य में पहाड़ ऐसे ‘नंगे’ क्यों हैं?
हिमाचल प्रदेश में इस वक्त मौसम का बेहद अजीब और मिला-जुला रूप देखने को मिल रहा है. राज्य में एक साथ तीन तरह के मौसम का चक्र चल रहा है.
लाहौल में जन्नत, पर्यटकों की चांदी बर्फ के शौकीनों के लिए लाहौल-स्पीति किसी स्वर्ग से कम नहीं है. मौसम विभाग का पूर्वानुमान बिल्कुल सटीक बैठा है. लाहौल की ऊंची चोटियों, खासकर बारालाचा, कुंजुम दर्रा और शिंकुला दर्रा, पर ताजा बर्फबारी हुई है. शिंकुला दर्रे से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो दिल खुश करने वाली हैं. वहां पर्यटक ताजी बर्फ के बीच जमकर मस्ती कर रहे हैं. हालांकि, इस बर्फबारी के बाद घाटी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और तापमान शून्य से काफी नीचे चला गया है, लेकिन पर्यटकों के चेहरे खिले हुए हैं.
शिमला से ज्यादा ठंडे हुए निचले शहर मौसम का गणित इस बार पूरी तरह बिगड़ा हुआ है. हैरानी की बात यह है कि पहाड़ों की रानी शिमला के मुकाबले निचले इलाके ज्यादा ठंडे हो गए हैं. ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी और यहां तक कि धर्मशाला में भी रात का तापमान शिमला से नीचे रिकॉर्ड किया जा रहा है. यानी पहाड़ पर रहने वालों को उतनी ठंड नहीं लग रही, जितनी तलहटी में रहने वाले लोगों को लग रही है.
कोहरे का येलो अलर्ट और धौलाधार का कनेक्शन बिलासपुर और मंडी जैसे जिलों में कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. यहां सुबह के वक्त घना कोहरा छाया रहता है. मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए इन इलाकों में घने कोहरे का विशेष अलर्ट जारी किया है. मौसम के जानकारों के अनुसार, मैदानी और निचले इलाकों में कोहरा तब तक नहीं छंटेगा, जब तक धौलाधार की पहाड़ियों पर अच्छी बर्फबारी नहीं हो जाती. फिलहाल कांगड़ा में धूप खिली है और धौलाधार सूखा है. जब तक इन पहाड़ियों पर सफेदी नहीं लौटती, तब तक निचले इलाकों के लोगों को कोहरे और सूखी ठंड से राहत मिलने के आसार कम ही हैं.
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