झांसी (उत्तर प्रदेश): बोर्ड परीक्षा में टॉप करने वाली नौ मेधावी छात्राओं को एक दिन के लिए झांसी जिले के
मऊरानीपुर में विभिन्न विभागों का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी बनाया गया. नवरात्र पर्व में माता के नौ अवतार के प्रतीक स्वरूप इन लड़कियों को अधिकारी बनाया गया. ऐसा महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उत्तर प्रदेश में चल रहे ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम के हिस्से के रूप में किया गया. तहसील में शनिवार को यह कार्यक्रम आयोजित हुआ. Also Read - UP: पॉलिटेक्निक कॉलेज में दोस्‍त से मिलने आई लड़की को हॉस्‍टल में खींच कर ले गए थे छात्र, किया था रेप

सुनैना मिश्रा को एसडीएम के रूप में सर्विस करने का मौका मिला, सर्कल ऑफिसर के रूप में नैंसी गुप्ता, तहसीलदार के रूप में दीक्षा अहिरवार, कृषि अधिकारी के रूप में वंशिका, शिक्षा अधिकारी के रूप में कृतिका, एसएचओ के रूप में कुमकुम, बीडीओ के रूप में अंजलि गुप्ता, सीएचसी प्रमुख के रूप में आशी गुप्ता और ईओ के रूप में कंचन अग्रवाल को प्रभार मिला. Also Read - पाकिस्तान से निकला टिड्डी दल यूपी पहुंचा, झांसी पर हमला, कई किलोमीटर लम्बा है झुंड, जिले में अलर्ट

सभी नौ लड़कियों को शनिवार की सुबह, आधिकारिक वाहनों में उनके घर से उनके कार्यालयों में लाया गया और एक दिन के लिए अधिकारियों के रूप में सेवा करने का अवसर दिया गया. उन्होंने उन अधिकारियों के मार्गदर्शन में पूरे दिन के लिए अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन किया जो उनकी मदद के लिए मौजूद थे. लड़कियों ने आदेश पारित किए और निर्देशों के साथ संबंधित विभागों को शिकायतकर्ताओं के आवेदन मार्क किए. Also Read - दादी से कब्र तक साथ जाने की बात कहती थी पोती और एक हादसे ने सच कर दी वह बात

सुनैना, जो एसडीएम के रूप में सेवा कर रही थीं, ने बाद में पत्रकारों को बताया कि वह उत्साहित थीं और ड्यूटी को संभालने के लिए रोमांचित थीं. सुनैना 12वीं कक्षा में दूसरे स्थान पर रहीं और नीट की तैयारी कर रही हैं, और एसडीएम के रूप में सेवा देने के अपने अनुभव के बाद, उन्होंने कहा कि वह अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा जरूर देंगी. नैंसी गुप्ता, जो सर्कल अधिकारी (सीओ) बनी थीं, ने बीएससी के लिए दाखिला लिया है और डॉक्टरेट करने का लक्ष्य रखा है. मौरानीपुर के एसडीएम अंकुर श्रीवास्तव, जिनका इसके पीछे हाथ रहा, ने कहा कि यह प्रयोग संतुष्टिदायक रहा. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बच्चों को उनके लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा.