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पुलिस अंकल चलो... 5 साल की नन्ही ने दिखाई बहादुरी, 200 मीटर दौड़ी, मां को मौत के मुंह से खींच लिया

यह घटना मासूम बच्ची की बहादुरी की मिसाल है, छोटी उम्र में भी साहस और समझदारी से बड़ी अनहोनी को रोका जा सकता है.

Written by: Farha Fatima
Published: February 23, 2026, 12:09 PM IST

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक मार्मिक घटना सामने आई है, जहां महज 5 साल की एक नन्ही बच्ची की बहादुरी और सूझबूझ ने अपनी मां की जान बचा ली. यह घटना 22 फरवरी 2026 को शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के नुमाइश पुरवा इलाके में हुई.पीड़ित महिला पूजा श्रीवास्तव अपने दिवंगत पति अभिषेक श्रीवास्तव के पैतृक मकान को लेकर लंबे समय से विवाद में थीं. उनके पति, ससुर और सास का पहले ही निधन हो चुका है. संपत्ति पर कब्जे को लेकर पूजा के ममेरे ससुर विनोद श्रीवास्तव और उनके पुत्र उत्कर्ष से विवाद चल रहा था. महिला ने पहले भी धोखाधड़ी और मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था.

घर में घुसकर समझौते के लिए दबाव

घटना के दिन शाम को आरोपियों ने पूजा के घर में घुसकर समझौते के लिए दबाव बनाया. जब पूजा ने मना किया, तो आरोपियों ने उसे घर के अंदर बंद कर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, गले पर चाकू रखकर मारपीट की गई और हत्या का प्रयास किया गया.इस दौरान पूजा की 5 साल की बेटी यशी मौके पर मौजूद थी.

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बच्ची पर कुत्ता छोड़ दिया

हमलावरों ने बच्ची को डराने के लिए अपना पालतू कुत्ता छोड़ दिया, जिसके हमले में बच्ची घायल हो गई. कुत्ते के काटने और नोचने के बावजूद नन्ही यशी ने हिम्मत नहीं हारी. घायल हालत में यशी ने घर से निकलकर करीब 200 मीटर दूर स्थित कोतवाली पुलिस स्टेशन तक दौड़ लगाई. वहां पहुंचकर वह रोते-चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों से बोली, “पुलिस अंकल, घर चलो… मम्मी को मार डालेंगे… मेरी मां को पीट रहे हैं.” उसकी यह पुकार सुनकर पुलिस तुरंत सक्रिय हुई.कोतवाली पुलिस ने बच्ची को साथ लेकर तत्काल मौके पर पहुंची. वहां महिला को बंधक बनाकर पीटते हुए आरोपियों को पाया गया. पुलिस ने मौके से ही विनोद श्रीवास्तव और उसके बेटे उत्कर्ष को हिरासत में ले लिया.

मां और बेटी दोनों सुरक्षित

पूजा को सुरक्षित बाहर निकाला गया. मां और बेटी दोनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया. पूजा ने आरोपियों के खिलाफ मारपीट, हत्या के प्रयास और अन्य धाराओं में तहरीर दी. अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी हरदोई) सुबोध गौतम ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

यह घटना मासूम बच्ची की बहादुरी की मिसाल है, छोटी उम्र में भी साहस और समझदारी से बड़ी अनहोनी को रोका जा सकता है. यशी की इस हिम्मत ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई को संभव बनाया और मां की जान बचाई.

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