लखनऊ: यूपी में आमजनता की शिकायतें तो दूर प्रशासनिक अफसर विधायकों की भी बात नहीं सुन रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कई सालों से तैनात अपर जिलाधिकारी (एडीएम) सत्ताधारी विधायक की भी नहीं सुन रहे. मामला एक राजकीय हाईस्कूल में तैनात प्रधानाचार्य के आवास आवंटन से जुड़ा है. Also Read - Farmers 5th Round Talk With Govt Live Update: किसान नेताओं और सरकार के बीच 5वें राउंड की मीटिंग शुरू

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बांदा सदर से भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी ने 23 अप्रैल को एडीएम गंगाराम गुप्ता को एक पत्र लिखकर राजकीय हाईस्कूल जबरापुर में तैनात प्रभारी प्रधानाचार्य भूपेंद्र कुमार को आवास विकास कॉलोनी में सरकारी आवास संख्या-28/3 के आवंटन के लिए अनुरोध पत्र लिखा था. इस पत्र में विधायक ने संबंधित अध्यापक की पत्नी और छह माह की बच्ची की बीमारी का हवाला दिया था, लेकिन एडीएम ने विधायक के पत्र को रद्दी की टोकरी में डालकर वह आवास किसी और को आवंटित कर दिया.

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सुधर नहीं रहे अफसर, अपनाना पड़ेगा और तरीका: विधायक

रविवार को मामले की शिकायत एक बार फिर विधायक के पास पहुंची. इस पर उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार से तैनात अधिकारी अब भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे, इन्हें सुधारने का कोई और तरीका अपनाना पड़ेगा. इस मामले में जब एडीएम से पूछा गया तो उनका जवाब था कि विधायक इसी तरह पत्र लिखते रहते हैं, हर पत्र पर कार्यवाही जरूरी नहीं है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी एडीएम पर रिश्वत लेकर अवैध बालू का खनन कराने के कथित आरोप लगते रहे हैं, इनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अनशन तक कर चुके हैं.