AAP-TMC और उद्धव की सेना के बाद क्या अब यूपी में होने जा रहा सियासी खेल? समाजवादी पार्टी में टूट के दावों से मची खलबली
योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है. उन्होंने समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट का दावा भी किया है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने चाचा राम गोपाल यादव (बीच में) और शिवपाल यादव (दाएं) के साथ. (ANI)
देश की विपक्षी पार्टियों में सियासी घमासान मचा हुआ है. पार्टी में टूट का ये सिलसिला पंजाब की AAP से शुरू हुआ फिर पश्चिम बंगाल की TMC से होते हुए महाराष्ट्र की शिवसेना (UBT) तक पहुंचा. अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के एक बयान ने सपा में टूट की अटकलों को हवा दे दी है. राजभर ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी (SP) के भीतर बड़ी टूट होने वाली है. हालांकि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की अटकलों को सिरे से खारिज किया है.
ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार (17 जून 2026) को एक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी में टूट को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा, "सिर्फ महाराष्ट्र और बंगाल की राजनीति पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम उत्तर प्रदेश में देखने को मिल सकता है. क्योंकि, समाजवादी पार्टी के कई नेता BJP में जाने के लिए तैयार बैठे हैं." राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी एक पोस्ट किया, "समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है. पूरी सपा BJP में जाने को तैयार बैठी है.”
राजभर का दावा- अखिलेश के चाचा ने शाह को लिखी चिट्ठी
राजभर ने कहा, "समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन नेताओं के नाम बताए गए हैं, जो समाजवादी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं. राम गोपाल यादव अखिलेश के चाचा लगते हैं." हालांकि, राजभर के इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है. न ही राम गोपाल यादव की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है.
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अखिलेश यादव ने दिया जवाब
वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजभर के दावों को खारिज किया. उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शायरी के अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, "दाना और गाना, कब तक चलेगा ये अफसाना."
राम गोपाल यादव बोले- राजभर अपनी पार्टी की फिक्र करें
ओम प्रकाश राजभर के बयान पर Zee News ने फोन पर राम गोपाल यादव से प्रतिक्रिया ली. यादव ने कहा, "मूर्खों की बातों का मैं कोई नोटिस नहीं लेता हूं. समाजवादी पार्टी में टूट का कोई सवाल ही नहीं है. जो कह रहा है वह अपनी पार्टी की चिंता करे."
वहीं, समाजवादी पार्टी से सांसद अफजल अंसारी ने भी टूट की अटकलों को खारिज किया है. अंसारी ने कहा, "समाजवादी पार्टी में कोई टूट नहीं है. सभी एक जुट हैं. कभी समाजवादी में टूट नहीं होगी, सपा से लोग जुड़ रहे है. सपा की साइकिल बिल्कुल सेफ है."
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राजभर के बयान के मायने?
समाजवादी पार्टी फिलहाल उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी ताकत है. पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है. ऐसे में अगर पार्टी के भीतर किसी तरह की टूट होती है, तो उसका सीधा असर राज्य की राजनीतिक तस्वीर पर पड़ सकता है. हालांकि, अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से किसी बड़े असंतोष या संभावित विभाजन के संकेत सार्वजनिक रूप से नहीं मिले हैं.
ऐसे में समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं की प्रतिक्रिया से ही साफ हो पाएगा कि राजभर का दावा राजनीतिक बयानबाजी है या फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की आहट.
पंजाब की AAP में कैसे हुई टूट?
- पंजाब में आम आदमी पार्टी में राघव चड्ढा की वजह से टूट हुई. AAP ने अप्रैल 2026 में राज्यसभा में अपने उपनेता राघव चड्ढा को पद से हटा दिया था.
- इसके बाद उन्होंने 6 सांसदों के साथ AAP का साथ छोड़ दिया और BJP में शामिल हो गए.
- पंजाब में AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद यानी दो-तिहाई सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वॉइन कर लिया.
- राघव चड्ढा के अलावा पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह सहानी, राजेंद्र गुप्ता और स्वाति मालिवाल ने BJP का दामन थाम लिया.
- इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी AAP विधायकों की बैठक बुलाई और विधानसभा में विश्वास मत (Trust Vote) पेश किया. AAP ने यह विश्वास मत जीत लिया और मान की सरकार पूरी तरह स्थिर है.
TMC में कैसे हुए टूट?
- 3 जून को TMC के 58 विधायकों ने बंगाल विधानसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखी और उनके गुट को मान्यता देने की मांग की. स्पीकर ने संख्याबल के आधार पर ये मांग मंजूर भी कर ली.
- इसके बाद सांसदों के इस्तीफे का दौर शुरू हुआ. काकोली घोष दस्तीकर समेत 20 लोकसभा सांसदों ने ममता का साथ छोड़ दिया. राज्यसभा से अब तक 4 सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है.
- इन बागी सांसदों ने सोमवार को NCPI में विलय कर लिया. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि उनकी सदस्यता बची रहे. इन सांसदों ने NDA को सपोर्ट करने की बात कही है.
कैसे टूटी उद्धव ठाकरे की सेना?
- महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बुधवार (17 जून) को बगावत कर दी.
- इन सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी.
- बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं. शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है.
- जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था.
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