नोएडा (उप्र). ग्रेटर नोएडा में सरकारी भूमि पर होने जा रही श्रीमद्भागवत कथा को बुधवार को रोक दिया गया क्योंकि अधिकारियों ने पाया कि इसके लिए समुचित अनुमति नहीं ली गई थी. इससे कुछ ही दिन पहले पुलिस ने चंद निजी फर्मों से उनके मुस्लिम कर्मचारियों को यहां एक सार्वजनिक उद्यान में नमाज पढ़ने से रोकने के लिए कहा था. अधिकारियों ने कहा कि ग्रेटर नोएडा के आवासीय सेक्टर 37 में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ बुधवार को होना था. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बुधवार सुबह एक भूखण्ड से तम्बू, मंच और लाउडस्पीकर हटवा दिए, जिसका इसके आयोजकों ने विरोध किया. यह भूखंड प्राधिकरण का है.

प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी सचिन सिंह ने बताया, ‘‘उन्हें कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी गई है. यदि वे इसे फिर भी करते हैं तो यह गैर कानूनी होगा.’’ स्थानीय पुलिस ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा की गई इस कार्रवाई से उसका कोई लेना-देना नहीं है. ग्रेटर नोएडा (प्रथम) के क्षेत्राधिकारी निशंक शर्मा ने बताया, ‘‘यह कार्रवाई प्राधिकरण अधिकारियों तथा प्राधिकरण से संबद्ध पुलिसकर्मियों ने की है. जिला पुलिस या स्थानीय कासना पुलिस थाने का कोई अधिकारी वहां नहीं था.’’ स्थानीय लोगों के अनुसार 100 वर्ग मीटर के इस भूखंड में दो छोटे ढांचे बने हुए थे जहां पूर्व में धार्मिक कार्यक्रम होते थे. उन्होंने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया,‘‘ये ढांचे भी गैर कानूनी हैं.’’ उन्होंने कहा कि इस स्थल पर मंगलवार रात से ही तम्बू, मंच एवं लाउडस्पीकर लगाए जा रहे थे.

एक अन्य अधिकारी ने भी अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि सुबह करीब 10 बजे जब ग्रेटर नोएडा के अधिकारी वहां पहुंचे तब तक सब कुछ लगा दिया गया था तथा 25-30 लोग वहां जुटे हुए थे. अधिकारी ने कहा, ‘‘सेक्टर का आवासीय कल्याण संघ (आरडब्ल्यूए) इस कार्यक्रम के आयोजन में शामिल नहीं था तथा मुख्य आयोजक इस सेक्टर के बाहर का है.’’ इस भूखंड से अतिक्रमण शाम पांच बजे तक खाली करा लिया गया और तब तक अधिकारी वहां खड़े रहे. इस माह के शुरू में, नोएडा सेक्टर 58 के पुलिस थाने ने 23 कंपनियों को नोटिस देकर यहां के एक स्थानीय उद्यान में उनके मुस्लिम कर्मचारियों को शुक्रवार की नमाज पढ़ने से रोकने को कहा था. इस आदेश को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया. बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि यदि इस नीति को लागू करना है तो इसे सभी जिलों और सभी धर्म के लोगों पर लागू किया जाना चाहिए. एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने भी इसकी आलोचना की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मी कावंरियों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाते हैं, किंतु सप्ताह में एक बार नमाज से शांति एवं भाईचारा बाधित होता है.