नई दिल्ली: पर्यटन मंत्री के जे अल्फॉन्स ने मंगलवार को कहा कि अगर रोम में 2000 साल पुराने कोलोसियम के पुनर्निर्माण का जिम्मा जूता बनाने वाली एक कंपनी को दिया जा सकता है तो सरकार की एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के तहत ताजमहल की देखरेख का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपे जाने में क्या दिक्कत है? पर्यटन मंत्रालय की एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के बारे में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विवाद तब पैदा हुआ जब लाल किले की देखरेख का जिम्मा सीमेंट कंपनी डालमिया भारत ग्रुप को दिया गया, लेकिन यह समझौता योजना के मुताबिक किया गया. Also Read - Pradhan Mantri kisan Maandhan Yojana: सरकार किसानों को दे रही है सालाना 36 हजार रुपये, 44 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन

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अब ताजमहल एडॉप्ट – ए – हैरीटेज योजना के तहत स्मारकों की सूची में शामिल है. योजना के तहत मुगल कालीन इस स्मारक की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा , ‘ इस योजना के तहत सूची में बड़ी संख्या में स्मारक शामिल हैं और ताज भी सूची में है. अगर कोलोसियम की देखरेख जूते बनाने वाली एक कंपनी कर सकती है तो ताज क्यों नहीं ? अल्फॉन्स ने कहा कि यह योजना सरकार की पर्यटन नीति का बड़ा हिस्सा है और एनजीओ और कोरपोरेट्स को आगे आने और ऐसी और धरोहरों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है.

कोलोसियम इटली के शहर रोम के मध्य में स्थित 2000 साल पुराना अंडाकार एम्फीथिएटर है. साल 2011 में इसकी देखरेख का जिम्मा जूते और चमड़े के बैग बनाने वाली इतालवी कंपनी टोड को दिया गया था.

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गौरतलब है कि सरकार के रवैये से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सरकार से कहा था कि ताजमहल की खूबसूरती को बहाल करिए या फिर आप चाहें तो इसे नष्ट कर सकते हैं. न्यायालय ने विश्व धरोहर की संरक्षा के प्रति केन्द्र , उत्तर प्रदेश सरकार और तमाम प्राधिकारों को उनके उदासीन और ढुलमुल रवैये के लिए आड़े हाथों लिया था.

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि आप (सरकार) ताज को बंद कर सकते हैं. आप चाहें तो इसे ध्वस्त कर सकते हैं और यदि आपने पहले से ही फैसला कर रखा है तो इससे छुटकारा पा सकते हैं. कोर्ट ने कहा था कि उत्तर प्रदेश (सरकार) को परवाह नहीं है. कोई कार्य योजना या दृष्टि दस्तावेज अभी तक नहीं मिला है. आप या तो इसे गिरा दीजिए या आप इसकी खूबसूरती बहाल कीजिये.

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शीर्ष अदालत मुगल बादशाह शाह जहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में आगरा में बनाए गए ताज महल को बचाने के लिए इसके आसपास के क्षेत्र में विकास कार्यो की निगरानी कर रही है. सफेद संगमरमर से बना यह स्मारक यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है. इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने ताजमहल और पेरिस में एफिल टावर के बीच समानता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह स्मारक संभवत : ज्यादा खूबसूरत है लेकिन भारत वहां के मौजूदा हालातों की वजह से लगातार पर्यटक और विदेशी मुदा गंवा रहा है.

(इनपुट भाषा)