आगरा: उत्तर प्रदेश में आगरा में बंदरों ने आतंक मचाया हुआ है. इसी सप्ताह 12 दिन के नवजात बच्चे की जान लेने के बाद यहां अब बंदरों ने एक महिला की जान ले ली. एक ही सप्ताह में हुईं दो मौतों के बाद लोग इतना डर गए हैं कि बंदरों के नाम से सिहर जा रहे हैं. बंदरों के आतंक के बीच सीएम योगी का वह बयान फिर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने शिकायत पर कहा था कि हनुमान चालीसा पढ़िए बंदर भाग जाएंगे. सीएम योगी ने बंदरों के बढ़ते आतंक पर आगरा के पड़ोस के जिले मथुरा में ये बयान दिया था. इस बयान पर विपक्ष ने भी चुटकी ली थी. बता दें कि मथुरा और आगरा दोनों ही जिलों के लोग बंदरों को पकड़ कर जंगल में छुड़वाने की मांग कर रहे हैं. इसकी जानकारी सीएम तक भी पहुंची थी. Also Read - निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए 157 लोगों की यूपी में तलाश, 8 इंडोनेशियाई बिजनौर की मस्जिद में मिले

बंदरों ने महिला से छीन नवजात को मारा था
आगरा में इन दिनों में बंदरों का खौफ छाया हुआ है. इसी सप्ताह सोमवार को घर में मौजूद नवजात बच्चे को बंदर छीन ले गए थे. बंदरों ने बच्चे के मां की गोद से छीन ले गए थे. घटना तब हुई थी जब बच्चे को महिला दूध पिला रही थी. इसी दौरान बंदरों ने हमला कर उसे मार दिया था. ये नवजात सिर्फ 12 दिनों का था. इस घटना का हड़कंप थमा भी नहीं था कि शुक्रवार को एक बार फिर बंदरों ने एक 58 वर्षीया महिला पर हमला कर दिया. बंदरों के हमले से गंभीर रूप से घायल हुई महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने इलाज एक दौरान दम तोड़ दिया. एक ही सप्ताह में दो मौतों से आगरा में हड़कंप का माहौल है. लोग बंदर नाम से ही डरने लगे हैं. Also Read - Corona के खिलाफ जंग: PM मोदी को होती है हर केस की जानकारी, वार रूम की तरह काम कर रहा PMO

सीएम योगी आदित्यनाथ बोले- बंदरों के आतंक से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें Also Read - COVID-19: कोरोना को लेकर पूर्वांचल में डर, प्रवासी बढ़ा सकते हैं यूपी सरकार की परेशानी

बंदरों के आतंक के बीच मथुरा में सीएम ने दिया था ये सुझाव
बता दें कि 1 सितंबर, 2018 को सीएम योगी ने बंदरों के आतंक की शिकायत पर कहा था कि लोग हनुमान चालीसा पढ़ें, बंदर परेशान नहीं करेंगे. यह बयान उन्होंने मथुरा में दिया था. मथुरा में भी लोग बंदरों की संख्या बढ़ने से परेशान हैं. यहां भी बंदर लोगों पर हमला कर देते हैं. बताया जा रहा है कि आगरा में इस समय 25 हजार से अधिक बंदर हैं. बंदरों की संख्या इतनी अधिक है कि शहर की अधिकतर जगहों पर बंदर नजर आते हैं. लोग अपनी छतों पर तक नहीं चढ़ते हैं. आगरा के लोग काफी समय से मांग रहे हैं कि बंदरों को पकड़ कर शहर से बाहर जंगल में छोड़ा जाए. बंदरों की नसबंदी भी की जाए ताकि इनकी संख्या न बढ़ सके.