प्रयागराज: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने मांग की है कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता दिवंगत अशोक सिंघल की मूर्ति अयोध्या और प्रयागराज में स्थापित की जानी चाहिए. सिंघल राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता थे. एबीएपी ने यह भी कहा है कि अयोध्या में मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों की याद में एक ‘कीर्ति स्तम्भ’ (स्मारक स्तंभ) भी बनाया जाना चाहिए. एबीएपी के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा, “मंदिर आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के नाम भी स्तंभों पर अंकित किए जाने चाहिए.” Also Read - इकबाल अंसारी का सीबीआई कोर्ट से आग्रह- अब खत्म हो बाबरी मस्जिद का मामला

संतों की योजना है कि एबीएपी में यह प्रस्ताव पारित करने के बाद केन्द्र को इस विषय में एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाए. इसके लिए एबीएपी की अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में नवरात्रि के दौरान होने जा रही बैठक में आगे की कार्रवाई होगी. एबीएपी के महासचिव स्वामी हरि गिरी ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दशकों तक संघर्ष चला और इस दौरान कई लोगों की जान गईं. विहिप के पूर्व प्रमुख अशोक सिंघल ने पूरी जिंदगी इसके लिए संघर्ष किया और कोठारी बंधुओं (कोलकाता के राम कुमार और शरद कोठारी) की 2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में पुलिस फायरिंग में मौत हो गई.” Also Read - चंपत राय ने किया उद्धव ठाकरे का समर्थन बोले- 'किसके बेटे में इतना दम जो उन्हें अयोध्या में घुसने से रोक सके'

उन्होंने आगे कहा, “अब, जब राम मंदिर का निर्माण शुरू होने वाला है, तो हम चाहते हैं कि अयोध्या और प्रयागराज में उनके सम्मान में एक ‘कीर्ति स्तम्भ’ का निर्माण किया जाए.” गिरि ने कहा कि उन्होंने ‘कीर्ति स्तम्भ’ के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है. इसमें संगम के पास सिंघल की प्रतिमा स्थापित करने के साथ-साथ उन लोगों के नाम भी बताए गए हैं जिन्होंने इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. Also Read - अयोध्या के साधु-संतों ने दी चेतावनी- भूल से भी इस शहर में प्रवेश ना करें उद्धव ठाकरे, नहीं तो...

उन्होंने संघर्ष में शामिल हुए लोगों के खिलाफ दर्ज हुए मामले वापस लेने को लेकर कहा, “अब जब राम मंदिर के लिए संघर्ष खत्म हो गया है, तो इससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को भी वापस लिया जाना चाहिए. हम पहले ही राज्य सरकार से इस संबंध में औपचारिक अनुरोध कर चुके हैं.” गिरि ने कहा कि संतों ने 5 अगस्त – राम मंदिर ‘भूमिपूजन दिवस’ को हर साल दीवाली के रूप में मनाने का फैसला भी किया है.