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अलग हुई सपा-बसपा की राहें! क्या हैं मायावती और अखिलेश के बयानों के मायने
मायावती के अकेले उपचुनाव लड़ने की बात पर अखिलेश यादव ने दिया जवाब.
नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के धमाकेदार प्रदर्शन ने विपक्षी महागठबंधन की चूलें हिला दी हैं. यही वजह है कि अभी चुनाव को समाप्त हुए एक पखवाड़ा भी नहीं बीता है कि सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की दीवारें दरकने लगी हैं. सोमवार को जहां बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की ओर से इसके संकेत मिले थे, वहीं मंगलवार को पहले बसपा सुप्रीमो के बयान और इसके बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के जवाब ने गठबंधन टूटने की पुष्टि कर दी. बसपा अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों के लिए संभावित उपचुनाव अपने बलबूते लड़ने की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि इससे सपा के साथ गठबंधन के भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा, गठबंधन बरकरार रहेगा. वहीं, इस बयान के आने के कुछ ही देर बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर गठबंधन नहीं होगा तो सपा उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी.
अखिलेश और मायावती के बयानों को लेकर अगले कुछ दिनों में यूपी में सियासी उथल-पुथल मचना तय है. इन दोनों नेताओं के बयानों पर अगर गौर करें तो यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि एक होकर भी भाजपा से चुनावी जंग में हारे ये दोनों योद्धा, अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन गंवाना नहीं चाहते हैं. खासकर समाजवादी पार्टी के लिए गठबंधन में बने रहना इसलिए भी मुश्किल हो गया है क्योंकि बीते लोकसभा चुनाव में यूपी के इस प्रमुख सियासी परिवार से जुड़े कई प्रत्याशियों को ही हार का सामना करना पड़ा है. वहीं, इसके उलट, बसपा ने लोकसभा चुनाव में 10 सीटों पर जीत हासिल की, जो 2014 के चुनाव के मुकाबले उसका बेहतरीन प्रदर्शन है.
BSP Chief Mayawati on SP-BSP coalition: It’s not a permanent break. If we feel in future that SP Chief succeeds in his political work, we’ll again work together. But if he doesn’t succeed, it’ll be good for us to work separately. So we’ve decided to fight the by-elections alone. pic.twitter.com/VP20N4zL4Y
— ANI UP (@ANINewsUP) June 4, 2019
SP Chief Akhilesh Yadav on SP-BSP coalition: If the coalition has broken, I will reflect deeply on it & if the coalition isn’t there in the by-elections, then Samajwadi Party will prepare for the elections. SP will also fight on all 11 seats alone pic.twitter.com/cl1LklZq09
— ANI UP (@ANINewsUP) June 4, 2019
मायावती ने मंगलवार को अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी अपने बलबूते उपचुनाव लड़ेगी, लेकिन सपा से गठबंधन बरकरार रहेगा. उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से उनके रिश्ते कभी खत्म नहीं होने वाले हैं. ‘‘सपा के साथ यादव वोट भी नहीं टिका रहा. अगर सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में सफल रहे तो साथ चलने की सोचेंगे. फिलहाल हमने उपचुनावों में अकेले लड़ने का फैसला किया है.’’ उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से नौ भाजपा विधायकों और सपा, बसपा के एक एक विधायक के सांसद बनने के बाद रिक्त होने वाली 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित है. इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा के अपने बलबूते चुनाव लड़ने का फैसला मायावती की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पार्टी नेताओं की बैठक में किया गया था. मायावती ने मंगलवार को अपने बयान के जरिए इसकी आधिकारिक पुष्टि की.
लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के आधार पर बसपा प्रमुख ने चुनाव में हार के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में यादव मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में सपा बसपा का साथ नहीं दिया. हालांकि उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से कोई मनमुटाव नहीं होने की भी बात कही है. मायावती के इस बयान के मीडिया में आने के कुछ ही देर बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर बात की. इसमें अखिलेश ने भी गठबंधन टूटने के संकेत दे दिए. अखिलेश यादव ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा, ‘अगर यूपी में बना यह गठबंधन टूटता है तो इसका मुझे बेहद अफसोस होगा. यदि आने वाले विधानसभा उपचुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव नहीं लड़ा गया, तो समाजवादी पार्टी अलग रहकर इन चुनावों की तैयारी करेगी. सपा प्रदेश की सभी 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी.’
(इनपुट – एजेंसी)
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