लखनऊ/दिल्ली: सपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रयागराज जाने से रोके जाने को लेकर बवाल मच गया है. सपा नेता और कार्यकर्ता लखनऊ, प्रयागराज सहित कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं, प्रयागराज में विरोध प्रदर्शन कर रहे सपाइयों पर लाठीचार्ज कर दिया गया. हिंसक झड़प में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव का सिर फूट गया, जबकि कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं. लखनऊ में सपा विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने भी राजभवन के गेट पर धरना शुरू किया. हालांकि राज्यपाल द्वारा कल पूर्वाह्न 10 बजे का समय दिये जाने पर धरना खत्म कर दिया गया. वहीं, मायावती ने भी इस मामले की निंदा की है. वह अखिलेश के समर्थन में उतर आई हैं. वहीं, दिल्ली में उत्तर प्रदेश भवन के सामने सपा से जुड़े दिलीप यादव व अन्य ने प्रदर्शन किया. यहां पहुंची दिल्ली पुलिस ने उन्हें साथियों सहित हिरासत में ले लिया है. दिलीप यादव का कहना है कि शांतिपूर्ण ढंग से अखिलेश यादव को रोके जाने का विरोध कर रहे थे, इसके बाद भी हमें हिरासत में लिया गया.

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योगी ने रोके जाने को सही ठहराया
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहुंचने पर वहां पहले से ही छात्रों के गुटों में चल रही तनातनी के और तेज होने की आशंका थी. इसी वजह से उन्हें रोका गया. बसपा अध्यक्ष मायावती ने गठबंधन के अपने सहयोगी सपा प्रमुख अखिलेश यादव को इलाहाबाद जाते वक्त लखनऊ हवाई अड्डे पर रोके जाने की कड़े शब्दों में निंदा की. मायावती ने ट्वीट किया कि अखिलेश को इलाहाबाद नहीं जाने देने की घटना अति निंदनीय और भाजपा सरकार की तानाशाही तथा लोकतंत्र की हत्या की प्रतीक है. क्या भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकार बसपा-सपा गठबंधन से इतनी ज्यादा भयभीत और बौखला गयी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधि तथा पार्टी कार्यक्रम आदि करने पर भी रोक लगाने पर तुल गयी है. ऐसी अलोकतांत्रिक कार्रवाईयों का डटकर मुकाबला किया जाएगा.


योगी बताएं अगर मेरे ऊपर कभी कोई धारा लगी हो: अखिलेश
सपा अध्यक्ष ने प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि मैं अराजकता और हिंसा फैलाने जा रहा था. मैं सन्यासी योगी से पूछना चाहता हूं कि अगर मेरे राजनीतिक जीवन में मेरे ऊपर एक भी धारा लगी हो तो बताएं.’ अखिलेश ने संवाददाताओं के सामने कुछ तख्तियां पेश करते हुए कहा ‘मुख्यमंत्री जी अपराधियों की तख्ती की बात बहुत करते हैं. मैं चाहता हूं कि उनकी तख्ती आज जरूर सामने आये. यह मुख्यमंत्री पर लगी धाराओं की तख्ती है. वह पहले मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने खुद ही अपने मुकदमे वापस लिये हैं. आप चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में देखें तो यही धाराएं आपको दिखेंगी.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रही है. वह मन बना चुकी है कि उसे क्या करना है.

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मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने साधा निशाना
दूसरी ओर, राज्य सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को सपा अध्यक्ष की सुर्खियां बटोरने की कोशिश मात्र करार दिया. उन्होंने कहा कि अखिलेश पूरे घटनाक्रम पर झूठ का सहारा ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया था कि किसी भी राजनेता, राजनीतिक कार्यकर्ता और राजनीतिक पार्टियों से संबंधित व्यक्तियों को उक्त कार्यक्रम में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह जानकारी जिलाधिकारी प्रयागराज की ओर से अखिलेश को दी गयी थी. सिंह ने यह भी कहा कि अखिलेश विश्वविद्यालय परिसर में हाल में हुई बमबाजी के मामले में भी झूठ बोल रहे हैं. इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई हुई और 15-16 लोग गिरफ्तार किए गए.