Opinion: 2027 के चुनाव से पहले बदलेगी UP की सियासत? सपा-अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ती नजदीकियों के मायने
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सपा की बढ़ती नजदीकियों को लेकर नई चर्चाएं तेज हैं. 2027 यूपी चुनाव, हिन्दुत्व राजनीति और संभावित चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए गए हैं.
Akhilesh Yadav with Swami Avimukteshwaranand
डॉ. अभय पांडेय: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्ठि यात्रा अब गौ-रक्षा के धार्मिक आवरण को पूरी तरह छोड़कर सपा की चुनावी मशीनरी में तब्दील हो चुकी है. कासगंज में गविष्ठि यात्रा के स्वागत में आजम खान परिवार से जुड़ी सपा नेताओं की खुली भागीदारी के महज दो दिन बाद अचानक अखिलेश यादव कासगंज पहुंच गए और उन्हीं पदाधिकारियों से बंद कमरे में लंबी मुलाकात की, जिन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा का आयोजन संभाला था. यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अखिलेश यादव के बीच कोई बड़ी डील हो रही है. सपा यह मानकर चल रही है कि अविमुक्तेश्वरानंद पार्टी को सुविधाजनक हिन्दुत्व’ वोट दे सकते हैं.
सपा के लिए अचानक इतने प्रासंगिक क्यों हो गये हैं अविमुक्तेश्वरानंद?
बता दें कि कासगंज के पटियाली विधानसभा में सपा विधायक नादिरा सुल्तान (आजम खान के भांजे की पत्नी) ने अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा की अगुवाई की थी. यही नहीं उनकी बहन और सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता जाहिदा सुल्तान भी पूरी ताकत से अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा में सक्रिय रहीं. और तो और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जाहिदा को कासगंज में अपना विधानसभा प्रतिनिधि भी नियुक्त कर दिया है. इधर अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा के दो दिन बाद ही अखिलेश यादव का कासगंज पहुंचना और यात्रा में प्रमुख भूमिका निभाने वाले नेताओं से मुलाकात करना चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने यहां वर्तमान योगी सरकार पर अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का आरोप भी लगाया है. यहीं से असली सवाल उभरता है कि अखिलेश को अचानक अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर इतनी दिलचस्पी क्यों जाग गई है?
अविमुक्तेश्वरानंद को अपने पक्ष वाला हिन्दुत्व का चेहरा बना रही सपा
गौरतलब है कि यही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं, जिन पर 2015 में वाराणसी में अखिलेश सरकार के दौरान पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया था. आज वही अखिलेश उन्हें 'अपने पक्ष' वाला वैकल्पिक हिन्दुत्व का चेहरा बनाकर भाजपा और योगी आदित्यनाथ पर हमला बोल रहे हैं. इधर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान लगातार सरकार और व्यक्तिगत रूप से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तीखे और अपमानजनक ही रहे हैं. इसके अलावा अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिलान्यास, लोकार्पण और धर्मध्वजा फहराने जैसे कार्यक्रमों का अखिलेश और अविमुक्तेश्वरानंद दोनों ने ही विरोध किया था, यहां तक कि दोनों आजतक श्रीराम मंदिर में दर्शन करने भी नहीं पहुंच सके हैं.
क्या सपा के लिए पूरा चुनावी रोडमैप लेकर निकले हैं अविमुक्तेश्वरानंद?
चर्चा बहत तेज है कि सपा के लिए अविमुक्तेश्वरानंद 2027 का पूरा चुनावी रोडमैप लेकर निकले हैं. गौ-रक्षा के भावनात्मक मुद्दे पर हिन्दू भावनाओं को छूते हुए यादव मुस्लिम और पिछड़े गठजोड़ के साथ ही ब्राह्मण वर्ग को जोड़ने का प्रयास भी हो रहा है. भाजपा के हिन्दुत्व की काट के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इस्तेमाल किया जा रहा है. पश्चिमी यूपी में मुस्लिम नेताओं के संपर्क को मजबूत करने और 2027 के वोट बैंक को साधने की रणनीति साफ नजर आ रही है.
(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. समसामयिक मुद्दों पर लेखन करते हैं. लेखक के ये अपने विचार हैं.)
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