लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता व रामपुर से सांसद आजम खान की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को जमानत मंजूर कर ली. आजम खान के साथ उनकी विधायक पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा तथा बेटे अब्दुल्ला आजम खान को भी जमानत मिली है. कोर्ट ने डॉ. तंजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम खान को तत्काल जेल से रिहा करने का निर्देश दिया है, जबकि आजम खां को इस केस के शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना का बयान दर्ज होने के बाद रिहा करने का आदेश दिया है. Also Read - बलिया कांड: BJP विधायक बोले- दूसरे पक्ष की FIR दर्ज न होने पर आमरण अनशन करूंगा

कोर्ट ने विचारण न्यायालय अलीगढ़ से कोर्ट खुलने पर तीन महीने के भीतर शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करने की उम्मीद की है. यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डॉ. तंजीन फातिमा, मोहम्मद आजम खान व मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की जमानत अर्जियों को निस्तारित करते हुए दिया है. Also Read - 'मिशन शक्ति' शुरू, CM योगी बोले- बेटियों पर बुरी नजर डालने वालों के लिए UP में कोई जगह नहीं

आजम खान व तंजीन फातिमा पर आरोप है कि उनके बेटे के दो जन्मतिथि प्रमाणपत्र बने हैं. एक नगर पालिका परिषद रामपुर व दूसरा नगर निगम लखनऊ से बनवाया गया है. दोनों में जन्म तिथि में काफी अंतर है. Also Read - कोर्ट ने कृष्‍ण जन्‍मभूमि से लगी मस्जिद को हटाने की मांग वाली याचिका स्‍वीकार की, अगली सुनवाई तय

अब्दुल्ला आजम खान पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का फायदा उठाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का आरोप है. हाईकोर्ट ने इनका चुनाव निरस्त कर दिया है. अब्दुल्ला आजम खान का कहना था कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है. इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए. तंजीन फातिमा का कहना था कि महिला होने के कारण जमानत दी जाए.

बता दें कि दोनों केस में जमानत के बाद भी आजम खां अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे. कोर्ट ने बीती 17 सितंबर को इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला अपने पास रखा था. आजम खान पर मजकूरा मामलों के अलावा भी कई केस दर्ज हैं. जब तक उन्हें सभी मामलों में जमानत नहीं मिल जाती, वह जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे.

इससे पहले सपा सांसद आजम और पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला को रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट से 7 अक्टूबर को जौहर यूनिवर्सिटी में किसानों की जमीन कब्जे के तीन मामलों में जमानत मिल चुकी थी.

बीजेपी के कार्यकर्ता आकाश सक्सेना ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उसका आरोप था कि आजम खान और डाक्टर तजीन फातिमा ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम खान के दो स्थानों से दो जन्म प्रमाण बनवाए थे
– एक प्रमाण पत्र 28 जनवरी, 2012 को नगर पालिका परिषद रामपुर से
– जबकि दूसरा प्रमाण पत्र 21 अप्रैल, 2015 को नगर निगम लखनऊ से बनवाया था.
– पहले जन्म प्रमाण पत्र में जन्म तिथि एक जनवरी, 1993 दर्ज है और इस प्रमाण पत्र का उपयोग पासपोर्ट आदि बनवाने में किया गया और विदेश यात्रा में इसका दुरुपयोग किया गया
– वहीं, दूसरे जन्म प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 30 सितंबर, 1990 दर्ज है और इसका दुरुपयोग सरकारी दस्तावेजों, विधानसभा चुनाव लड़ने और जौहर युनिवर्सिटी को विभिन्न मान्यता दिलाने में किया गया
– दोनों जन्म प्रमाण पत्र जाली थे और आरोपी व्यक्तियों द्वारा निजी लाभ के लिए इनका उपयोग किया गया.

– जमानत देते हुए अदालत ने कहा, “इस अदालत का विचार है कि चूंकि तीसरे याचिकाकर्ता (अब्दुल्ला आजम खान) ने नगर निगम, लखनऊ के समक्ष अपनी जन्म तिथि बदलने के लिए कोई हलफनामा नहीं दिया है, लेकिन इसे तजीन फातिमा और मोहम्मद आजम खान द्वारा किया गया, इसलिए वह तत्काल प्रभाव से रिहा किए जाने का पात्र है.”

– अदालत ने कहा, “तजीन फातिमा को महिला होने के नाते सीआरपीसी की धारा 437 (1) का लाभ मिलना चाहिए और उसे जमानत पर रिहा किया जाए.

– कोर्ट ने कहा मोहम्मद आजम खान को शिकायतकर्ता का बयान निचली अदालत में दर्ज होने की तिथि पर ही रिहा किया जाए- सभी आवेदकों के आपराधिक इतिहास हैं, लेकिन किसी भी मामले में अदालत द्वारा इन्हें दोषी करार नहीं दिया गया है. ”

– अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जांच के दौरान या मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों पर दबाव डालकर मुकदमे के साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और सुनवाई टलवाने का प्रयास किए बगैर सुनवाई में सहयोग करेंगे.
– साथ ही वे जमानत पर रिहा होने के बाद किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं होंगे या कोई अपराध नहीं करेंगे.