सीतापुर: जिले में पिछले 6 माह में एक दर्जन नौनिहालों को आदमखोर कुत्तों ने अपना निवाला बना डाला. दो दर्जन से ज्यादा मासूम बच्‍चों को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया. इस घटना को अपने यहां की मीडिया ने भले ही हल्‍के में लिया, लेकिन अमेरिकी मीडिया ने सीतापुर की इस घटना को प्रमुखता से उठाया है. ‘द गार्जियन पोस्ट’ ने ‘उत्तर भारत में 6 बच्चों को आवारा कुत्तों के झुण्ड ने मार डाला’ हेडलाइन के साथ खबर छापी है. वहीं सीबीएस न्यूज़ ने ‘भारत में एक हफ्ते के अंदर 6 बच्चों की आवारा कुत्तों ने जान ली’ हेडलाइन के साथ खबर को प्रमुखता दी है. Also Read - चीन मुझे राष्ट्रपति पद पर नहीं देखना चाहता: डोनाल्ड ट्रंप

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एक दर्जन मासूमों की मौत के बाद जागा प्रशासन Also Read - कैसे रुकेगा आदमखोर कुत्तों का आतंक ? कुत्तों के आगे बेबस प्रशासन, ग्रामीणों ने एक कुत्ते को पीट पीट कर मार डाला

सीतापुर जिले में पिछले लगभग 6 माह से आदमखोर कुत्तों का आतंक व्याप्त है. एक दर्जन नौनिहालों को गंवाने के बाद इन खूंखार कुत्तों पर काबू पाने में सीतापुर प्रशासन लगातार बेबस और नाकाम नजर आ रहा था. मीडिया में खबरें फैलने और चौतरफा दबाव पड़ने के पश्चात प्रशासन ने कुत्तों को पकड़ने के लिए लखनऊ और मथुरा से डॉग कैचर स्कॉड को मदद के लिए बुलाया. सूत्रों के अनुसार इस बीच आक्रोशित ग्रामीणों ने लगभग 20 कुत्तों को मार डाला. वही 30 से ज्यादा कुत्तों को टीम ने पकड़ने में कामयाबी पाई. पकड़े गए कुत्तों को लखनऊ के कान्हा उपवन लाया गया है जहां उनको स्टेराइल करने के बाद फिर से उनके इलाके में छोड़ दिया जाएगा. कुत्तों पर नजर रखने के लिए लखनऊ से नाइट विजन वाले ड्रोन कैमरे भी लगाए गए हैं और टीम अब 24 घंटे सक्रिय रूप से अभियान चला रही है.

आदमखोर कुत्तों का आतंक

 

दुधवा और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सीतापुर पहुंचे एक्‍सपर्ट

स्ट्रीट डॉग्स के व्यवहार में इस प्रकार के परिवर्तन के कारण और वजहों का अध्ययन करने के लिए पीलीभीत और दुधवा टाइगर रिजर्व से भी एक्सपर्ट सीतापुर पहुंचे हैं. वैसे तो कुत्तों को मनुष्य का मित्र माना जाता है और कुत्तों और मनुष्य का सह-अस्तित्व तो आदिकाल से चला आ रहा है लेकिन अचानक से इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों का व्यवहार परिवर्तन आश्चर्यजनक है. यहां तक कि अमेरिकी मीडिया भी अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि भारत में स्ट्रीट डॉग्स का मनुष्यों के साथ सह-अस्तित्व सामान्य बात है उन्हें लोगों के घरों से खाना भी मिल जाता है फिर उनका यूं आक्रामक हो जाना अजब है.

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एनिमल वेलफेयर की गाइड लाइन भी बाधक

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के अनुसार आवारा कुत्तों को मारा नहीं जा सकता सिर्फ स्टेराइल कर सकते हैं, आवारा कुत्तों को उनके एरिया से बाहर भी नहीं छोड़ा जा सकता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि योगी सरकार की सख्ती के बाद अवैध बूचड़खाने बंद हो गए, जिससे जानवरों के मांस खाने के आदी कुत्ते इंसानों का मांस खाने लगे. इन खतरनाक कुत्तों के लिए बच्चे सबसे आसान शिकार होने लगे. आवारा कुत्तों को उनके एरिया से बाहर भी नहीं छोड़ा जा सकता है.