आगरा: भारत का सबसे बड़ा और पुराना उत्तर प्रदेश के बटेश्वर में लगने वाला 374 साल पुराना पशु मेला इस साल नहीं लगेगा. यह मेला साल 1646 से आयोजित किया जा रहा है. आगरा के जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन.सिंह ने कहा, “जिला परिषद को सूचित किया गया है कि कोविड-19 दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए बटेश्वर मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती है. Also Read - शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे सादिक का निधन, बेटे ने दी जानकारी, सीएम योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख

उत्तर भारत के लाखों लोग हर साल मेले में आते हैं. लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह के कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती है. लिहाजा सार्वजनिक हित को देखते हुए इस साल इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा.” Also Read - UP कैबिनेट ने Ayodhya Airport का नया नाम मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एयरपोर्ट करने के प्रस्‍ताव को पास किया

ऐसी किंवदंती है कि राजा बदन सिंह ने यमुना की दिशा मोड़ने के लिए एक बांध बनवाया था ताकि वह हमेशा एक मंदिर से बहती रहे. इसके लिए उन्होंने भगवान शिव के अवतार बटेश्वर महादेव का मंदिर बनाया था. Also Read - Night Curfew Update: इस राज्य के आठ शहरों में लगा नाइट कर्फ्यू, मास्क न लगाने पर लगेगा 500 रुपये का जुर्माना, धारा 144 लागू

मंदिर परिसर में शिव को समर्पित 100 से अधिक मंदिर हैं, जो नदी के किनारे के अर्धचंद्राकार वक्र के किनारे लाइन से बने हुए हैं. बटेश्वर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली भी है. बता दें कि 374 साल में यह पहली बार होगा जब बटेश्वर में पुश मेला नहीं आयोजित किया जाएगा. बटेश्वर में पुश मेले का आयोजन दिवाली के दो दिन पहले से किया जाता है और यह अगहन मास की पंचमी तक लगता है.