नोएडा: यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में जमीन खरीद-फरोख्त के दौरान हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के लिए प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा है.

कुमार ने बताया कि इस मामले की जांच के बाद कल कासना थाने में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी पीसी गुप्ता, तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा सहित 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया. उन्होंने बताया कि डीसीओ सतीश, विशेष कार्याधिकारी बीपी सिंह, नायब तहसीलदार रणवीर सिंह एवं चमन सिंह, परियोजना प्रबंधक अतुल कुमार सिंह, नियोजन प्रबंधक बृजेश कुमार और लेखपाल पंकज की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध पाई गई है.

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फर्जीवाड़े से मुआवजा लेने वालों से दोगुनी वसूली होगी
कुमार ने बताया कि इन सभी की भूमिकाओं की गहन जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश शासन को रिपोर्ट भेजी गई है. अध्यक्ष ने बताया कि फर्जीवाड़े के माध्यम से मुआवजा लेने वाले लोगों से दोगुनी धनराशि वापस ली जाएगी तथा जिन अफसरों ने इस घोटाले को अंजाम दिया उनसे ब्याज के तौर पर 40 करोड़ रुपए वसूले जायेंगे. उन्होंने कहा कि जमीन खरीद के अन्य मामलों की भी जांच कराई जा रही है. जांच के दौरान यह पता चला है कि कुछ और अफसरों ने भी अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर जमीन खरीद फरोख्त में घोटाला किया है.

आरोपियों को पकड़ने के लिए चार टीमें बनी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल ने बताया कि जमीन खरीद घोटाले में फंसे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गयी हैं. इन टीमों ने देर रात से आज सुबह तक करीब एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की है. इसमें यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता का ग्रेटर नोएडा स्थित आवास और तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा का दिल्ली में पटपड़गंज स्थित आवास शामिल है. दोनों अभी फरार हैं.

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प्राधिकरण को 126 करोड़ रुपये राजस्व घाटा हुआ
यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण में तैनात इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने थाना कासना में कल रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले जनपद मथुरा के सात गांव शिव पट्टी बांगर, शिव पट्टी खादर, कैलाना बांगर, कैलाना खादर, सोनपुर बांगर, नौझील बांगर आदि की 97 हेक्टेयर भूमि को फर्जी कंपनी बनाकर खरीदा गया तथा आवश्यकता नहीं होने के बावजूद भी इस जमीन का बाजार दर से दोगुने दाम पर यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहण किया गया. आरोप है कि इससे प्राधिकरण को 126 करोड़ रुपये राजस्व घाटा हुआ. (इनपुट एजेंसी)