प्रयागराज: केंद्र सरकार द्वारा तीन विभूतियों को दिए गए भारत रत्न के फैसले से जहां विपक्षी दलों में नाराजगी नजर आई तो वहीं भाजपा व संघ के करीबी माने जाने वाले योग गुरु बाबा रामदेव भी खुश नजर नहीं आए. उन्होंने अपनी नाराजगी साफ तौर पर नहीं दिखाई, लेकिन संतों को भी भारत रत्न देने की मांग की. इस दौरान उन्होंने मदर टेरेसा को भारत रत्न से नवाजे जाने को धर्म विशेष के होने से जोड़ा.

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रविवार को कुंभ-2019 में शामिल होने पहुंचे पतंजलि ब्रांड के स्वामी बाबा रामदेव ने मीडिया के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने के सवाल पर कहा कि डॉ. मुखर्जी, भूपेन हजारिका और नानाजी देशमुख को भारत रत्न मिलने से भारत भी गौरवान्वित हुआ है. सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति को भारत रत्न देकर सही कार्य किया है. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 70 सालों में किसी भी संन्यासी को भारतरत्न नहीं मिला है. कई संन्यासी ऐसे हैं, जिन्होंने अभूतपूर्व कार्य किए हैं. चाहे वह महर्षि दयानंद सरस्वती हों या स्वामी विवेकानंद, शिवकुमार स्वामी जी. इन सभी संतों ने इतना योगदान दिया है. यह दुर्भाग्य है कि किसी भी संन्यासी को आज तक भारतरत्न से गौरवान्वित नहीं किया गया है.

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रामदेव ने कहा कि वह केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि भविष्य में किसी संन्यासी को भी भारतरत्न दिया जाए. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मदर टेरेसा को दे सकते हैं, क्योंकि वह ईसाई थीं, लेकिन संन्यासी को नहीं दे सकते, क्योंकि वो हिंदू हैं. इस देश में हिंदू होना गुनाह है क्या? उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि अगली बार कम से कम किसी एक संन्यासी को भारत रत्न दिया जाए.”