नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व प्रमुख पी. सी. शर्मा ने बुधवार को कहा कि बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लगे आपराधिक साजिश के आरोप को हटाने के उनके निर्णय की पुष्टि हुई है.Also Read - अलवर कांड: नाबालिग से रेप केस की जांच CBI से कराई जाएगी, राजस्थान सरकार का फैसला

लखनऊ स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद शर्मा ने कहा, ”फैसले से वही मत प्रकाश में आया है जो मैंने लगभग दो दशक पहले व्यक्त किया था कि कोई आपराधिक साजिश नहीं है.” Also Read - Chhattisgarh: निलंबित एडीजी जीपी सिंह दो दिन की पुलिस रिमांड में भेजे गए

शर्मा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान मामले के प्रत्येक ब्योरे का अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आडवाणी के खिलाफ आपराधिक साजिश का कोई आरोप नहीं बनता. Also Read - UP Election: ED के ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर ने लिया VRS, BJP के टिकट से लड़ सकते हैं चुनाव

उन्होंने कहा कि इस आधार पर रायबरेली अदालत में आवेदन दायर कर इसे 2003 के सीबीआई के निर्णय के बारे में सूचित किया गया, लेकिन एजेंसी पर सवाल उठाए गए. उन्होंने कहा, ”मेरा मानना है कि आज का फैसला उन सब आरोपों का जवाब है और मामला अपने अंजाम तक पहुंच चुका है.”

बता दें कि केंद्रीय एजेंसी ने मामले में अदालत के समक्ष साक्ष्य के रूप में 351 गवाह और 600 दस्तावेज पेश किए थे.

असम कैडर तथा 1966 बैच के आईपीएस अधिकारी शर्मा ऐसे अधिकारी हैं जो इंटरपोल के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 28 साल पुराने मामले में विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस के यादव ने आज आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह सहित सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया.

बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 को कारसेवकों द्वारा अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस की घटना से कई महीनों तक दंगे भड़के रहे थे. इससे देश भर में लगभग 2,000 लोग मारे गए. कारसेवकों ने दावा किया कि मस्जिद एक प्राचीन राम मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी.