नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व प्रमुख पी. सी. शर्मा ने बुधवार को कहा कि बाबरी विध्वंस मामले में सभी 32 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लगे आपराधिक साजिश के आरोप को हटाने के उनके निर्णय की पुष्टि हुई है. Also Read - जेल से छूटने के बाद ड्रग्स केस की आरोपी रिया चक्रवर्ती बिग बॉस 14 में करेंगी एंट्री? लेकिन...

लखनऊ स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद शर्मा ने कहा, ”फैसले से वही मत प्रकाश में आया है जो मैंने लगभग दो दशक पहले व्यक्त किया था कि कोई आपराधिक साजिश नहीं है.” Also Read - टीआरपी घोटाला! सीबीआई ने अपने हाथों में ली जांच, दर्ज की पहली FIR

शर्मा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान मामले के प्रत्येक ब्योरे का अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आडवाणी के खिलाफ आपराधिक साजिश का कोई आरोप नहीं बनता. Also Read - Hathras case Latest Updates: कहां तक पहुंची हाथरस मामले की सीबीआई जांच? अब आरोपियों की बारी

उन्होंने कहा कि इस आधार पर रायबरेली अदालत में आवेदन दायर कर इसे 2003 के सीबीआई के निर्णय के बारे में सूचित किया गया, लेकिन एजेंसी पर सवाल उठाए गए. उन्होंने कहा, ”मेरा मानना है कि आज का फैसला उन सब आरोपों का जवाब है और मामला अपने अंजाम तक पहुंच चुका है.”

बता दें कि केंद्रीय एजेंसी ने मामले में अदालत के समक्ष साक्ष्य के रूप में 351 गवाह और 600 दस्तावेज पेश किए थे.

असम कैडर तथा 1966 बैच के आईपीएस अधिकारी शर्मा ऐसे अधिकारी हैं जो इंटरपोल के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.

अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 28 साल पुराने मामले में विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस के यादव ने आज आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और कल्याण सिंह सहित सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया.

बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 को कारसेवकों द्वारा अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस की घटना से कई महीनों तक दंगे भड़के रहे थे. इससे देश भर में लगभग 2,000 लोग मारे गए. कारसेवकों ने दावा किया कि मस्जिद एक प्राचीन राम मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी.