लखनऊ: शादी समारोह के बारे में जब सोचते हैं तो भारी भरकम पंडाल, गाड़ियाँ, लाइटिंग, आतिशबाजी, बैंड, बाजा… यही सब दिमाग में आता है, लेकिन बांदा जिले के नरैनी इलाके में इन सब से दूर अनोखी शादी हुई. दूल्हे कार से नहीं, बल्कि बैलगाड़ी से आया. उसे दुल्हन के घर के दरवाजे तक घोड़े पर नहीं बल्कि पालकी पर बैठा कर लाया गया. बराती भी बैलगाड़ियों से दुल्हन के दरवाजे तक पहुंचे. हरे पत्तों से बनी पत्तलों में भोजन हुआ और पानी कुल्हड़ों में. किसी शोर-शराबे और डीजे पर नाच-गाने की बजाय पौधे लगाकर जश्न मनाया गया. पौधों की रक्षा का संकल्प लिया. बारातियों को भी शादी में पौधे भेंट किए गए. शादी पूरी तरह से इको-फ्रेंडली हुई. Also Read - मध्य प्रदेश के पन्ना में खुल गया किसान की किस्मत का ताला, खेत की खुदाई में मिला 60 लाख रुपये का हीरा

पूरी तरह इको-फ्रेंडली हुई शादी
ये अनोखी शादी उत्तर प्रदेश के बुंदलेखंड के बांदा जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है. जिले के नरैनी कसबे के गांव मोहनपुर खलारी में शादी संपन्न हुई. किसान संतोष कुमार ने अपनी बेटी प्रीती की शादी मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सरबई गांव के सुरेंद्र पटेल के साथ की. बुआराम भाउराम पटेल और अध्यापक यशवंत पटेल ने किसान की बेटी को अपनी भतीजी मान विवाद के सारे इन्तेजाम किए. इको फ्रेंडली शादी कराने का कांसेप्ट भी उन्हीं का ही था. इसके बाद विवाह जिस तरह से हुआ वह मिसाल है. शादी से पहले ही तय हुआ था कि शादी पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होगी. कोई तामझाम नहीं होगा. हुआ भी यही. Also Read - बुंदेलखंड के बांदा में कर्ज के चलते की किसान ने सुसाइड, पत्‍नी ने कहा- बैंक लोन की वसूली का था दबाव

दुल्हन ने पौधे लगाए. बारातियों को पौधे भेंट किए गए.

दुल्हन ने पौधे लगाए. बारातियों को पौधे भेंट किए गए.

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बैलों को सजाया, पालकी पर लाया गया दूल्हा
शादी के लिए दूल्हा बैलगाड़ी पर पहुंचा. बराती भी बैलगाड़ी से पहुंचे. बैलों को बरात ले जाने से पहले नहलाया गया. बैलों को सजाया धजाया गया. दुल्हन के दरवाजे तक दूल्हे को पालकी पर ले जाया गया. दो लोगों ने पालकी को उठाया. बारातियों को खाना ताजा तैयार कराई गईं हरे पत्तों में कराया गया. प्लास्टिक की चीजों को दूर रखा गया. चूल्हे पर खाना बना. दूल्हे ने जो मुकुट पहना वह गांव में ही खजूर के पत्तों का तैयार किया गया था. स्वागत गेट के लिए आम, जामुन के पत्ते लगाए गए. बांस पर पत्ते सजाये गए. आशीष बताते हैं कि इसे गांवों में पहले हाथी दरवाजा कहते थे. आशीष सागर बताते हैं कि बारात और शादी देखने के लिए लोग रात भर जुटे रहे.

स्वागत द्वार पत्तों का बनाया गया.

स्वागत द्वार पत्तों का बनाया गया.

 

दूल्हा-दुल्हन ने लगाए पौधे, हर बराती को गिफ्ट में मिले पौधे
शादी की सभी रस्मों के बाद शादी में मौजूद रहे वैन विभाग के फारेस्ट रेंजर व जेके जायसवाल ने दूल्हा दुल्हन से आवला के पौधे रोपित कराए. इसके बाद विदाई के दौरान सभी बारातियों को पौधे भेंट किए गए. और संकल्प लिया गया कि सभी पौधों की रक्षा करेंगे. गांव की प्रधान सुमनलता पटेल बताती हैं कि गांव को फिर से प्रकृति के और करीब ले जाना है.

दूल्हे को लाने के लिए पालकी का विशेष इंतजाम किया गया.

दूल्हे को लाने के लिए पालकी का विशेष इंतजाम किया गया.

 

शादी के कार्ड पर लिखे गए थे ये स्लोगन
इस शादी का कार्ड भी अनोखा था. इस पर कई स्लोगन लिखे गए गए. पर्यावरण बचाओ-देश बचाओ. जन-जन में चेतना लाओ, पर्यावरण की अलख जगाओ. पेड़ पौधे मत करो नष्ट, सांस लेने में होगा कष्ट. पर्यावरण का रखें ध्यान-तभी देश बनेगा महान, जैसे स्लॉग लिखे गए थे.

कचरा भी पर्यावरण के अनुकूल
आशीष बताते हैं कि अक्सर शादियों में खराब हुआ खाना फेंका जाता है. प्लास्टिक के गिलास, दोने फेंके जाते हैं. ये पर्यावरण के लिए बहुत नुकसान देह है. जबकि यहां हुई शादी में जब दोने पत्तल फेंके गए तो उन्हें जानवरों ने खा लिया. कुल्हड़ फेंके गए, जो कि मिट्टी में कुछ दिन में घुल जाएंगे. अगर ये चलन में आ जाए तो वाकई पर्यावरण को हम अतुलनीय योगदान दे सकते हैं.