नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण को समय से पहले जेल से रिहा कर दिया हो, लेकिन इससे भाजपा के प्रति उसके गुस्से में कोई कमी नहीं आई है. जेल से रिहा होने के कुछ घंटों बाद ररावण ने शुक्रवार को कहा कि वह सुनिश्चत करेगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 2019 के लोकसभा चुनावों में हार हो.

आजाद को पिछले साल जून में हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार किया गया था. सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में पांच मई को हुई हिंसा के सिलसिले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी. इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई थी जबकि 16 अन्य घायल हुए थे. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो नवंबर 2017 को उसे जमानत दे दी थी. पुलिस ने हालांकि उसकी रिहाई से कुछ दिनों पहले ही उसके खिलाफ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज कर दिया. उसे रासुका के तहत एक नवंबर तक हिरासत में रखा जाना था.

उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने लखनऊ में गुरुवार को कहा, ‘‘चंद्रशेखर की मां के प्रतिवेदन के बाद, उसे जल्दी रिहा करने का फैसला लिया गया. उसे एक नवंबर तक जेल में रहना था.’’
दलित संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल ने कहा कि आजाद तड़के दो बजकर 40 मिनट पर जेल से बाहर निकला और उसके स्वागत के लिये ‘भीम आर्मी’ की नीली टोपी पहने सैकड़ों कार्यकर्ता जेल के बाहर मौजूद थे.

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आजाद ने कहा, ‘‘भीम आर्मी सरकार के दबाव में नहीं झुकेगी और भाजपा को आम चुनावों में सत्ता से बाहर खदेड़ने के लिये संवैधानिक तरीके से लड़ेगी.’’ दलित नेता ने दावा किया कि उसे जेल के अंदर कई परेशान युवक मिले जिन्हें पुलिस ने उनकी जाति की वजह से फर्जी तरीके से फंसाया था. उन्होंने कहा कि जेल में बंद किये जाने के दौरान दलितों के खिलाफ किये जा रहे कथित अत्याचार से लड़ने का उनका संकल्प और मजबूत हुआ है.

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खुद चुनाव न लड़ने का जिक्र करते हुए 31 वर्षीय दलित नेता ने कहा, ‘‘यह हमारे अधिकारों के लिये बेहद लंबी संवैधानिक लड़ाई है. यह असली लड़ाई का वक्त है. नेता के आभाव में भीम आर्मी कमजोर पड़ती दिख रही थी लेकिन अब मैं लौट आया हूं.’’ आजाद ने कहा कि जेल में उन्हें ‘‘सूखी रोटियां’’ दी गईं और उसके परिवार को उससे मिलने नहीं दिया गया.

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‘‘मैंने जो कुछ भुगता है मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भाजपा को सूद समेत उसे 2019 के लोक सभा चुनाव में वापस करूं.’’ उसने कहा कि एससी/एसटी कानून को लेकर सरकार सियासत कर रही है और दलित समुदाय 2019 के चुनावों में भाजपा को इसका उचित जवाब देगा.