बलिया (उत्तर प्रदेश): भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य एवं पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह ने कोरोना संक्रमण से हुईं मौतों को लेकर बड़ा दावा किया है. बीजेपी नेता ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से सबक न लेने के कारण दूसरी लहर में हर गांव में कम से कम दस लोगों की मौत हुई है. भाजपा नेता राम इकबाल सिंह ने बलिया जिले के नगरा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भाजपा सरकार को असहज करने वाला यह बयान दिया है. बीजेपी नेता ने स्पष्ट किया कि वह भाजपा सरकार को सचेत करने के लिए यह बयान दे रहे हैं ताकि उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP Assembly Election 2022) के आगामी चुनाव में पार्टी को इस दुर्व्यवस्था के कारण खामियाजा भुगतना न पड़े.Also Read - उद्धव के इस्तीफे के बाद शिवसेना नेता Sanjay Raut ने किया ट्वीट, 'धोखाधड़ी का अंत अच्छा नहीं होता'

बीजेपी नेता राम इकबाल सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की पहली लहर से सबक नहीं लिया और इस वजह से दूसरी लहर में बड़ी संख्या में संक्रमितों की मौत हुई है. उन्होंने दावा किया कि कोई ऐसा गांव नहीं है, जहां कोरोना संक्रमण से 10 लोगों की जान न गई हो. बीजेपी नेता ने संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी की. Also Read - उद्धव ठाकरे के इस्तीफे से देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ, पार्टी नेताओं के साथ लड्डू खाते आए नजर

पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि बलिया जिले में स्वास्थ्य विभाग की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है और आजादी के 75 वर्ष बाद 34 लाख आबादी वाले इस जिले के अस्पतालों में न डॉक्टर हैं और न दवाएं. जब पूछा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों बलिया के दौरे में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर संतोष प्रकट किया था तो भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया है, उन्हें सच्चाई नहीं दिखाई. सिंह ने किसानों की स्थिति को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि किसान आज पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं तथा अन्नदाता अब खेती छोड़ने के लिए विवश हो गए हैं. Also Read - भाजपा नेता पर पत्नी से मारपीट करने और दहेज में कार मांगने का आरोप, केस दर्ज हुआ तो बोले- सब झूठ है

भाजपा नेता ने कहा कि गेहूं खरीद पर सरकार ने एमएसपी (न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य) 1975 रुपये कर पिछले वर्ष की खरीद दर से केवल 72 रुपये की ही बढ़ोत्तरी की है जबकि किसानों की लागत दोगुना बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को डीजल पर किसानों को सब्सिडी देनी चाहिए.

ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी भाजपा नेता ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन को लेकर अपनी नाराजगी जताई हो. इससे पहले, मई में सीतापुर से भाजपा के विधायक राकेश राठौर ने कोविड-19 के प्रबंधन की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, ‘ अब विधायकों की क्या हैसियत रह गई है, अगर हम ज्यादा बोलते हैं तो हम पर देशद्रोह का आरोप लगा दिया जाएगा.’ इसी तरह गत नौ मई को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बरेली में कोविड-19 से निपटने की व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी दर्ज करायी थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारी टेलीफोन नहीं उठाते हैं और रेफर करने के नाम पर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से मरीजों को लौटाया जा रहा है. गंगवार ने बरेली में खाली ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी किल्लत और चिकित्सा उपकरणों को ऊंचे दामों पर बेचे जाने की शिकायत भी की थी.