नई दिल्ली: टेंट में रह रहे राम लला को अब भाजपा सांसद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलवाना चाहते हैं. एक तरफ तो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर संत समाज, शिव सेना, विहिप और आरएसएस जैसे संगठन लगातार प्रदर्शन कर ही रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के घोसी संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद हरिनारायण राजभर ने नया शिगूफा छोड़ते हुए मांग की है कि जब पीएम मोदी सभी को आवास दिलवा रहे हैं तो बरसों से टेंट में रह रहे भगवान राम को भी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अयोध्या में एक आवास तो मिलना ही चाहिए. अपनी मांग को लेकर भाजपा सांसद ने डीएम अयोध्या (फैजाबाद) को पत्र भी लिखा है.

किसी ने नहीं दिया जवाब
सांसद हरिनारायण राजभर के मुताबिक, ‘मोदी सरकार चाहती है कि देश में कोई भी शख्स बिना छत के ना रहे, ऐसे में प्रभु राम टेंट में रह रहे हैं, जहां उन्हें जाड़ों में ठंड का सामना करना पड़ता है, कड़ी गर्मी झेलनी पड़ती है और बारिश की बौछारें सहनी पड़ती हैं. ऐसे में सरकार का कर्तव्य है कि उनको भी पक्की छत मिले. 1992 से राम लला टेंट में मौसम की विषम परिस्थितियों को झेल रहे हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रभु राम को भी आवास मिलना चाहिए.’ इस मामले पर भाजपा सांसद का कहना है कि उन्होंने भगवान राम के आवास का मुद्दा भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में भी उठाया था, लेकिन गृहमंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से उन्हें इसका कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला. भाजपा सांसद ने इसे लेकर डीएम अयोध्या को भी पत्र लिख कर मांग की है कि भगवान राम को पीएम आवास योजना के तहत घर मिले.

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अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 4 जनवरी को अगली सुनवाई होनी है. 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने टाल दिया था उसके बाद से संत समाज व शिवसेना ने इस मुद्दे पर काफी हंगामा काट रखा है. शिवसेना ने शीतकालीन सत्र के दौरान इस मुद्दे पर संसदीय कार्यों में गतिरोध भी पैदा किया और खूब हंगामा भी काटा उससे पहले अयोध्या में विराट धर्मसभा के आयोजन में भी सरकार से इस मुद्दे पर विधेयक लाने की मांग की गई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी. बता दें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर बाबरी मस्जिद की विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया था. 2010 के बहुमत वाले फैसले में हाइकोर्ट ने केस के तीनों पक्षों- रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में 2.77 एकड़ जमीन को बराबर बांटने का आदेश दिया था. जिसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है.