पहले छीना पद...अब पार्टी से किया बेदखल, भतीजे आकाश आनंद के खिलाफ मायावती ने लिया बड़ा एक्शन

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Updated Date:March 3, 2025 6:39 PM IST

शनिवार को मायावती ने आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटा दिया था. अब एक दिन बाद उन्हें पार्टी से निकालने की घोषणा की. यह सब क्यों हुआ चलिए आपको बताते हैं.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इससे एक दिन पहले मायावती ने उन्हें नेशनल को-ऑर्डिनेटर समेत सभी पदों से हटा दिया था. अब सोमवार को मायावती ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि आकाश आनंद को पूरी तरह पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

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मायावती ने आकाश को पार्टी से क्यों निकाला?

मायावती ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर बताया कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर पार्टी हित से ज्यादा व्यक्तिगत मामलों में उलझ गए थे. यही वजह रही कि उन्हें पार्टी से बाहर करना पड़ा. उन्होंने साफ किया कि बसपा में अनुशासन सबसे अहम है, और बाबा साहेब अंबेडकर व कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

अशोक सिद्धार्थ को ठहराया जिम्मेदार

आकाश को पहले सभी पदों से हटाना, और फिर पार्टी से निकाल देने के फैसले पर मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को सबसे बड़ा कारण बताया. उन्होंने कहा कि आकाश पर उनके ससुर का प्रभाव ज्यादा हो गया था, जिससे उनकी विचारधारा और पार्टी के प्रति समर्पण कमजोर पड़ने लगा. बसपा प्रमुख ने कहा कि यह सिर्फ आकाश की गलती नहीं, बल्कि उनके ससुर की भी इसमें भूमिका है.

मायावती ने ये भी कहा कि जब आकाश को पदों से हटाया गया था, तब उनसे उम्मीद थी कि वे इस फैसले को समझेंगे और परिपक्वता दिखाएंगे. लेकिन उनकी प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया कि वे अब पार्टी के अनुशासन के अनुरूप नहीं चल रहे हैं.

आकाश आनंद ने क्या कहा?

वहीं, आकाश आनंद ने मायावती के फैसले का पूरी तरह सम्मान करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वे मायावती को अपना नेता मानते हैं और उनके फैसले को पत्थर की लकीर की तरह स्वीकार करते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत भावुक करने वाला पल है और अब उन्हें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा.

आकाश ने पोस्ट में आगे लिखा कि वे हमेशा बहुजन समाज के लिए संघर्ष करते रहेंगे और पार्टी के मिशन को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. उनके इस बयान से यह संकेत मिला कि भले ही वे फिलहाल पार्टी से बाहर हो गए हों, लेकिन राजनीति में उनका सफर खत्म नहीं हुआ है.

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