लखनऊ: कानपुर के बिकरू गांव में पिछले हफ्ते पुलिस पर घात लगाकर किए गए हमले का मास्टरमाइंड विकास दुबे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है लेकिन इस बीच पुलिस महकमें के अंदर ही पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर उन पर गाज गिरना शुरू हो गया है. कानपुर गोलीकांड में सवालों के घेरे में आए आईपीएस अनंत देव का तबादला हो गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें एसटीएफ से हटाकर पीएसी में भेजा गया है. इसके अलावा यूपी में मंगलवार शाम को चार आईपीएस के तबादले किए गए. अनंत देव पर माफिया विकास दुबे के करीबियों से संबंध का आरोप है. Also Read - संजय दत्‍त को तीसरे स्‍टेज का लंग कैंसर, इलाज के लिए जल्द अमेरिका होंगे रवाना

बता दें कि अनंत देव एसटीएफ के डीआईजी थे और कानपुर में एसएसपी के रूप में कार्यकाल के दौरान लगे थे कई आरोप लगे थे. गौरतलब है कि बिकरू गांव में पिछले हफ्ते पुलिस पर घात लगाकर किए गए हमले का मास्टरमाइंड विकास दुबे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है मगर इस मामले में तीन और लोग गिरफ्तार किए गए हैं. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. Also Read - आर्मी हॉस्पिटल में ब्रेन सर्जरी के बाद लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जांच में पाए गए थे कोरोना पॉजिटिव

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पुलिस के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि बिकरू कांड मामले में विकास की एक करीबी रिश्तेदार क्षमा, विकास के पड़ोसी सुरेश वर्मा और नौकरानी रेखा को गिरफ्तार किया गया है . रेखा गत रविवार को गिरफ्तार किए गए विकास के गुर्गे दयाशंकर अग्निहोत्री की पत्नी है. उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. हालांकि पुलिस पर घात लगाकर हमला करने वाले 17 अभियुक्त अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.

सीईओ मिश्रा के वायरल पत्र में हस्ताक्षर वास्तविक नहीं: पुलिस अधिकारी अनंतदेव
ये मामला काफी पेंचीदा नजर आ रहा है. दरअसल कानपुर मुठभेड़ में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा के सोशल मीडिया में वायरल हुए एक कथित पत्र के बारे में कानपुर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनंत देव का कहना है कि इस तथाकथित पत्र में जो हस्ताक्षर हैं वह सीओ मिश्र के हस्ताक्षर से नही मिलते. इस वायरल पत्र के मामले की जांच पुलिस महानिरीक्ष (आईजी), लखनऊ लक्ष्मी सिंह को सौंपी गयी है और उन्होंने जांच आरंभ कर दी है.

अनंतदेव ने कहा कि जहां तक उन्हें याद है कि ऐसा कोई पत्र उनके सामने नही आया था. अब इस मामले की जांच आईजी लखनऊ कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आ जायेगी. गौरतलब है कि मिश्रा का तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंनतदेव को भेजा गया एक कथित पत्र सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें उन्होंने कथित रूप से चौबेपुर के थाना प्रभारी विनय तिवारी और माफिया सरगना विकास दुबे के बीच संबंध होने के गंभीर आरोप लगाए थे. यह पत्र कानपुर पुलिस के रिकार्ड मे नही पाया गया है.

कानपुर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और यूपी एसटीएफ के ‘पूर्व’ डीआईजी अनंतदेव ने मंगलवार को बताया, ‘पहली बात तो यह कि जो पत्र मीडिया में वायरल हो रहा है और उसके हस्ताक्षर और दिवंगत क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्रा के हस्ताक्षर आपस में नही मिलते है. उनके अन्य पत्रों के हस्ताक्षर और इस वायरल पत्र के हस्ताक्षर में बहुत अंतर है.’ उन्होंने कहा,’ एक एसएसपी के सामने प्रतिदिन सैकड़ों प्रार्थनापत्र और पत्र आते हैं..कोई भी पत्र पहले एसएसपी कार्यालय आता है जहां उसे वहां का मुंशी रजिस्टर में अंकित करता है. फिर उसके बाद वह पत्र पेश होता है. हर पत्र में एक पत्रांक संख्या और तिथि अंकित होती है, जो इस वायरल पत्र में कहीं नहीं है.’’