नई दिल्ली: बसपा प्रमुख मायावती इन दिनों एक्शन में हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी करने वाले पार्टी के उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह को आज ही पार्टी से निकालने के बाद मायावती ने एक और बड़ा फैसला लिया है. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने तैयारी तेज कर दी है. उन्होंने इन तीनों राज्यों के प्रदेश प्रभारियों को बदल दिया है. तीनों राज्यों में 2018 के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए मायावती अब लगातार फैसले ले रही हैं.

भाजपा को सत्ता से दूर रखना जरूरी, हमारे गठबंधन के परिणाम अच्छे आ रहे हैं: मायावती

इन नेताओं को बनाया प्रभारी

मायावती ने मध्य प्रदेश में राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदारी दी है. अशोक को मायावती का करीबी माना जाता है. इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ में धर्मवीर अशोक और केरल में मुनकाद अली को प्रभारी के तौर पर नियुक्त किया है. मध्य प्रदेश में राम अचल राजभर को हटाकर अशोक सिद्धार्थ को प्रभारी बनाया गया है. बता दें कि मध्य प्रदेश में बसपा-सपा के साथ गठबंधन कर सकती है. इसकी लगातार संभावनाएं जताई जा रही हैं. यूपी के गोरखपुर, फूलपुर, कैराना जैसी सीटों पर सपा ने बसपा के साथ मिलकर बीजेपी को हरा दिया था. सफल परिणाम को देखते हुए बसपा और सपा मिलकर यूपी के साथ ही मध्य प्रदेश में भी चुनाव लड़ सकती हैं. इन पार्टियों के बीच 2019 में भी गठबंधन तय माना जा रहा है.

आंबेडकर जयंती: मायावती ने कहा- दलितों के प्रति पीएम की नीयत साफ़ नहीं, अखिलेश बोले- यूपी में दलितों के साथ बढ़ रहा अत्याचार

लगातार फैसले ले रहीं मायावती
राजस्थान में वसुंधरा सरकार के मात देने के लिए यहां भी बसपा सुप्रीमो ने गेम खेला है. मायावती पूर्व राज्य सभा सांसद मुनकाद अली को राजस्थान का प्रभारी बनाया गया है. इसके साथ ही उन्हें यूपी के अलीगढ़ और आगरा मंडल का भी कोऑर्डिनेटर बनाया गया है. वहीं, हरियाणा और पंजाब के प्रभारी की जिम्मेदारी अतर सिंह राव कोदी गई है. दिनेश चंद्र को बिहार में बीएसपी का नया प्रभारी बना दिया गया है. बता दें कि मायावती इन दिनों लगातार ख़बरों में हैं. कुछ दिन पहले ही बसपा के उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर टिप्पणी करने को लेकर उपाध्यक्ष पद से हटा दिया था. इसके बाद उन्होंने आज जय को पार्टी से ही निकाल दिया। इससे उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह कांग्रेस से गठबंधन को लेकर गंभीर हैं और पार्टी के नेताओं द्वारा कांग्रेस या राहुल गांधी के खिलाफ कोई बात नहीं सुनेंगीं। न ही इजाजत देंगीं।