लखनऊ: बसपा प्रमुख मायावती ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में भीड़ की हिंसा के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. मायावती ने कहा कि हर तरह की अराजकता को संरक्षण देने का परिणाम है कि अब क़ानून के रखवाले भी बलि चढ़ रहे हैं. यह अति-दुःख और चिंता की बात है. बुलंदशहर में सोमवार को हुई हिंसक घटना में एक पुलिस अधिकारी और एक युवक की मौत पर गहरा दुःख तथा संवेदना व्यक्त करते हुए मायावती ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि भाजपा और उसकी सरकारों को उसके ही द्वारा उत्पन्न किए गए भीड़तंत्र के हिंसक एवं अराजक राज को खत्म करने के लिए देश और प्रदेशों में कानून का राज स्थापित करने का पूरी ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए ताकि देश के संविधान व लोकतंत्र को भीड़तंत्र की बलि चढ़ने से रोका जा सके. Also Read - Muradnagar Crematorium Roof Collapes Incident: मुरादनगर में श्मशान घाट पर छत ढहने से 23 की मौत, सीएम योगी ने जांच के दिए आदेश, पीएम मोदी ने जताया दुख

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बीजेपी के लोग भी हो रहे हिंसा के शिकार

मायावती ने सोमवार रात को राजधानी लखनऊ में भाजपा के एक युवा नेता प्रत्यूषमणि त्रिपाठी की हत्या का उल्लेख करते हुये बयान में कहा कि भाजपा द्वारा उत्पन्न भीड़तंत्र की उग्र तथा हिंसक स्थिति का शिकार अब स्वयं भाजपा के लोग ही होने लगे हैं. बसपा प्रमुख ने बयान में मांग की है कि बुलन्दशहर में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार सभी दोषियों को सख्त सजा, समय पर दिलाना सुनिश्चित किया जाना चाहिये ताकि देश को महसूस हो कि उत्तर प्रदेश में कोई सरकार भी है.

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ये है पूरा मामला

बता दें कि बुलंदशहर थाना कोतवाली क्षेत्र के गांव महाव के जंगल में गौकशी की सूचना आग की तरह फैली. इससे लोग आक्रोशित हो गए और घटनास्थल पर पहुंचे और कथित तौर पर काटे गए गोवंश के गोवंश अवशेषों को ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर सोमवार सुबह चिंगरावठी पुलिस चौकी पर पहुंचे. गुस्साई भीड़ ने बुलंदशहर-गढ़ स्टेट हाईवे पर ट्रैक्टर ट्रॉली लगाकर रास्ता जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. सूचना मिलने पर एसडीएम अविनाश कुमार मौर्य और सीओ एसपी शर्मा पहुंचे. इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया. बेकाबू भीड़ ने पुलिस के कई वाहन फूंक दिए. साथ ही चिंगरावठी पुलिस चौकी में आग लगा दी.

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ग्रामीणों की तरफ से भी जमकर फायरिंग

पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ने बताया कि पुलिस की तरफ से हवाई फायरिंग हुई. ग्रामीणों की तरफ से भी जमकर फायरिंग की गई. इंस्पेक्टर को सिर में किसी ‘ब्लंट ऑब्जेक्ट’ से चोट लगी. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश पुलिसकर्मियों ने की, लेकिन उन्हें ले जाने नहीं दिया गया. इसके बाद किसी तरह उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां अधिक रक्त स्राव की वजह से उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों का प्रथम दृष्टया कहना है कि किसी ब्लंट ऑब्जेक्ट से चोट लगने और अधिक रक्त बहने की वजह से मौत हुई है. फिलहाल मौत के बाद पोस्टमार्टम में वजह का खुलासा होगा. इस हिंसा में सुमित पुत्र समरजीत सिंह की भी मौत हो गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा होगा कि इंस्पेक्टर और सुमित की मौत कैसे हुई. एडीजी ने बताया कि सुबोध कुमार सिंह दादरी के अखलाक हत्याकांड में 28 सितम्बर 2015 से 9 नवम्बर 2015 तक जाँच अधिकारी थे, इस मामले में चार्जशीट दूसरे जांच अधिकारी ने मार्च 2016 मे दाखिल की थी.