
Zeeshan Akhtar
2008 से 2013 के बीच पत्रकारिता में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन. पढ़ाई के दौरान ही दैनिक जागरण में बतौर रिपोर्टर काम करना शुरू किया. हेल्थ, स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, क्राइम जैसी बीट्स कवर ... और पढ़ें
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) का दोनों सदनों से पास होने का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि ओबीसी और एसटी समाज (OBC ST) की महिलाओं को अलग-अलग आरक्षण ना देना, सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है. इसे ओबीसी और एसटी समाज की महिलाओं के साथ धोखा माना जाएगा.
महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाने का स्वागत, किन्तु देश इसका भरपूर व जोरदार स्वागत करता अगर उनकी अपेक्षाओं के मुताबिक यह अविलम्ब लागू हो जाता. अब तक लगभग 27 वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद अनिश्चितता का अब आगे और लम्बा इंतजार करना कितना न्यायसंगत? वैसे देश की आबादी के बहुसंख्यक ओबीसी समाज की महिलाओं को आरक्षण में शामिल नहीं करना बहुजन समाज के उस बड़े वर्ग को न्याय से वंचित रखना है. इसी प्रकार एससी व एसटी समाज की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं देना भी उतना ही अनुचित व सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है.
1. महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाने का स्वागत, किन्तु देश इसका भरपूर व जोरदार स्वागत करता अगर उनकी अपेक्षाओं के मुताबिक यह अविलम्ब लागू हो जाता। अब तक लगभग 27 वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद अनिश्चितता का अब आगे और लम्बा इंतजार करना कितना न्यायसंगत?
— Mayawati (@Mayawati) September 22, 2023
किन्तु जहाँ चाह है वहाँ राह है और इसीलिए सरकार ओबीसी समाज को इस महिला आरक्षण बिल में शामिल करे, एससी व एसटी वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण दे तथा इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सभी जरूरी उपाय करे. धार्मिक अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं की भी उपेक्षा अनुचित.
मायावती ने आशंका जताई
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सरकार से महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने का आग्रह किया, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर इसके क्रियान्वयन में कई वर्षों तक “देरी” होगी. मायावती ने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि महिला आरक्षण “तत्काल” लागू हो जाए. उन्होंने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधानों को इस तरह से तैयार किया गया है कि आरक्षण का लाभ अगले 15 या 16 वर्षों तक या बाद के “कई चुनावों” तक महिलाओं तक नहीं पहुंच पाएगा.
2. वैसे देश की आबादी के बहुसंख्यक ओबीसी समाज की महिलाओं को आरक्षण में शामिल नहीं करना बहुजन समाज के उस बड़े वर्ग को न्याय से वंचित रखना है। इसी प्रकार एससी व एसटी समाज की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं देना भी उतना ही अनुचित व सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है।
— Mayawati (@Mayawati) September 22, 2023
सरकार की नियत साफ़ नहीं
बसपा नेता ने कहा, ‘‘यह बात किसी से छिपी नहीं हैं कि देश भर में नये सिरे से जनगणना कराने में कई वर्ष लग जाते हैं. पिछली जनगणना वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई थी. जिसके पश्चात आज तक पुन: जनगणना नहीं हो सकी. ऐसी स्थिति में संविधान संशोधन के तहत इस नयी जनगणना में कई वर्ष लग जायेंगे. तब फिर उसके बाद ही पूरे देश में परिसीमन का कार्य शुरू किया जाएगा, इसमें भी कई साल लगेंगे. इस परिसीमन के पश्चात ही यह महिला आरक्षण विधेयक लागू होगा.’’
मायावती ने कहा, ‘‘जबकि 128 वें संशोधन विधेयक की सीमा ही पन्द्रह वर्ष रखी गयी है. इस प्रकार से यह स्पष्ट है कि यह संशोधन विधेयक वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने की साफ नियत से नहीं लाया गया हैं.’’ उन्होंने कहा कि यह विधेयक आने वाली विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में देश की भोली भाली महिलाओं को यह प्रलोभन देकर और उनकी आंखों में धूल झोंक कर उनका वोट हासिल करने की नियत से ही लाया गया है. इसके सिवा कुछ भी नहीं है, जैसा कि इसे लागू करने की शर्तें रखी गयी हैं.’’
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.