Women's Reservation Bill: OBC, ST समाज के लिए धोखा है महिला आरक्षण बिल, केंद्र की नियत साफ नहीं-मायावती

मायावती ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

Published date india.com Published: September 22, 2023 3:07 PM IST
Women's Reservation Bill: OBC, ST समाज के लिए धोखा है महिला आरक्षण बिल, केंद्र की नियत साफ नहीं-मायावती

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) का दोनों सदनों से पास होने का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि ओबीसी और एसटी समाज (OBC ST) की महिलाओं को अलग-अलग आरक्षण ना देना, सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है. इसे ओबीसी और एसटी समाज की महिलाओं के साथ धोखा माना जाएगा.

महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो जाने का स्वागत, किन्तु देश इसका भरपूर व जोरदार स्वागत करता अगर उनकी अपेक्षाओं के मुताबिक यह अविलम्ब लागू हो जाता. अब तक लगभग 27 वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद अनिश्चितता का अब आगे और लम्बा इंतजार करना कितना न्यायसंगत? वैसे देश की आबादी के बहुसंख्यक ओबीसी समाज की महिलाओं को आरक्षण में शामिल नहीं करना बहुजन समाज के उस बड़े वर्ग को न्याय से वंचित रखना है. इसी प्रकार एससी व एसटी समाज की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं देना भी उतना ही अनुचित व सामाजिक न्याय की मान्यता को नकारना है.

किन्तु जहाँ चाह है वहाँ राह है और इसीलिए सरकार ओबीसी समाज को इस महिला आरक्षण बिल में शामिल करे, एससी व एसटी वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण दे तथा इस विधेयक को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सभी जरूरी उपाय करे. धार्मिक अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं की भी उपेक्षा अनुचित.

मायावती ने आशंका जताई
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने सरकार से महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने का आग्रह किया, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर इसके क्रियान्वयन में कई वर्षों तक “देरी” होगी. मायावती ने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि महिला आरक्षण “तत्काल” लागू हो जाए. उन्होंने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधानों को इस तरह से तैयार किया गया है कि आरक्षण का लाभ अगले 15 या 16 वर्षों तक या बाद के “कई चुनावों” तक महिलाओं तक नहीं पहुंच पाएगा.

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सरकार की नियत साफ़ नहीं
बसपा नेता ने कहा, ‘‘यह बात किसी से छिपी नहीं हैं कि देश भर में नये सिरे से जनगणना कराने में कई वर्ष लग जाते हैं. पिछली जनगणना वर्ष 2011 में प्रकाशित हुई थी. जिसके पश्चात आज तक पुन: जनगणना नहीं हो सकी. ऐसी स्थिति में संविधान संशोधन के तहत इस नयी जनगणना में कई वर्ष लग जायेंगे. तब फिर उसके बाद ही पूरे देश में परिसीमन का कार्य शुरू किया जाएगा, इसमें भी कई साल लगेंगे. इस परिसीमन के पश्चात ही यह महिला आरक्षण विधेयक लागू होगा.’’

मायावती ने कहा, ‘‘जबकि 128 वें संशोधन विधेयक की सीमा ही पन्द्रह वर्ष रखी गयी है. इस प्रकार से यह स्पष्ट है कि यह संशोधन विधेयक वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने की साफ नियत से नहीं लाया गया हैं.’’ उन्होंने कहा कि यह विधेयक आने वाली विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में देश की भोली भाली महिलाओं को यह प्रलोभन देकर और उनकी आंखों में धूल झोंक कर उनका वोट हासिल करने की नियत से ही लाया गया है. इसके सिवा कुछ भी नहीं है, जैसा कि इसे लागू करने की शर्तें रखी गयी हैं.’’

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