नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर बड़ा दांव खेला है. मायावती ने गरीब सवर्णों, मुस्लिमों और अन्य गरीब अल्पसंख्यकों के लिए 18 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है. मायावती का कहना है कि अगर मोदी सरकार गरीबों के लिए आरक्षण के मुद्दे को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लाती है तो बीएसपी सबसे पहले समर्थन देगी. बीएसपी सुप्रीमो ने केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने का स्वागत किया. साथ ही कहा कि यह प्रयास केवल कोरा कागजी, दिखावटी व चुनावी स्वार्थ भरा नहीं होना चाहिए बल्कि इन वर्गों को संवैधानिक व कानूनी हक भी पूरी ईमानदारी से मिलने चाहिए. Also Read - Haryana में प्राइवेट सेक्‍टर में 75 फीसदी आरक्षण, विधानसभा ने बिल को हरी झंडी दिखाई

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मराठा आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है. संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की प्रावधान नहीं है. फिर आखिर क्या बात है कि मायावती आर्थिक आधार पर सामान्य श्रेणी के गरीबों के लिए आरक्षण की मांग कर रही हैं. मायावती पिछले 10 सालों से ज्यादा समय से सत्ता से दूर हैं. 2007 में यूपी में मायावती की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी. माना जाता है कि मायावती की सोशल इंजीनियरिंग ने काम किया और सवर्णों ने मायावती को वोट दिया. हालांकि आरक्षण के मुद्दे को लेकर सवर्ण जातियां मायवती से दूरी बनाए हुए हैं. यही कारण है कि बीएसपी सुप्रीमों हर वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आरक्षण की वकालत कर रही हैं. मायावती ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को मूल रूप में बहाल किए जाने को लेकर संशोधन विधेयक के लोकसभा से पारित होने का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह जल्द ही राज्यसभा से भी पारित हो जाएगा.

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मायावती ने संशोधन विधेयक में देरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना भी साधा. बसपा प्रमुख ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में अपने राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ को ध्यान में रखकर ही यह संशोधन विधेयक लाया गया. उन्होंने कहा कि विधेयक में देरी से इन वर्गों को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई करना बहुत मुश्किल है, हालांकि तब भी हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है.

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मायावती ने कहा कि वह इसका पूरा श्रेय बसपा समर्थकों समेत देश के तमाम् एससी/एसटी वर्गों के लोगों को देती हैं जिन्होंने इस कानून के पूर्व स्वरूप को बहाल कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार पर दबाव बनाया. इसके लिए 2 अप्रैल 2018 को भारत बन्द अभियान में सक्रिय रहे. आंदोलन के बाद भाजपा सरकारों के अन्याय-अत्याचार का शिकार बने. इनमें कई लोगों को तो जान भी गंवानी पड़ी. जबकि अनेक लोग अभी भी फर्जी आरोपों में जेलों में कैद हैं.

बसपा सुप्रीमो ने केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने का स्वागत किया. साथ ही कहा कि यह प्रयास केवल कोरा कागजी, दिखावटी व चुनावी स्वार्थ भरा नहीं होना चाहिये बल्कि इन वर्गों को संवैधानिक व कानूनी हक भी पूरी ईमानदारी से मिलने चाहिए.