नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने गुरुवार को अपनी पार्टी के सात बागी विधायकों को निलंबित कर दिया. इन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशी रामजी गौतम के नामांकन का विरोध किया था. मायावती ने एक अन्‍य बयान में कहा कि भविष्य में सपा उम्मीदवारों को हराने के लिए बसपा पूरी ताकत लगाएगी और जरूरत पड़ी तो भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देगी.Also Read - Uttarakhand Assembly Election 2022: बहुजन समाज पार्टी ने जारी की अपने 37 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट

मायावती ने अपने कुछ विधायकों के पाला बदलने की अटकलों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधा और कहा कि भविष्य में विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवारों को हराने के लिए उनकी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी तथा जरूरत पड़ी तो भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देगी. Also Read - EC ने सपा को वर्चुअल रैली में कोविड नियमों के उल्लंघन पर जारी किया नोटिस, 24 घंटे में जवाब मांगा

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही बागी विधायक किसी भी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं तो बसपा उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई करेगी.

बीएसपी प्रमुख ने एक बयान में कहा कि पार्टी संगठन को सूचित किया गया है कि निलंबित विधायकों को पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए. मायावती ने एक बयान में कहा कि भविष्य में सपा उम्मीदवारों को हराने के लिए बसपा पूरी ताकत लगाएगी और जरूरत पड़ी तो भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन देगी.

6 विधायकों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी
बसपा को बुधवार को उस समय झटका लगा था जब पार्टी के छह विधायकों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी और इसके बाद उन्होंने संकेत दिये थे कि वे पार्टी बदल सकते हैं. इसके साथ ही इनमें से चार विधायकों ने हलफनामा दायर कर कहा कि बसपा के राज्यसभा उम्मीदवार रामजी गौतम की उम्मीदवारी के प्रस्तावक के तौर पर उनके हस्ताक्षर फर्जी है.

गेस्टहाउस कांड को भूलकर लोकसभा चुनाव में सपा के साथ तालमेल किया था
एक बयान में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि आगामी विधान परिषद चुनाव में सपा के दूसरे उम्मीदवार
को हराने के लिए बसपा पूरी ताकत लगाएगी. उन्होंने गेस्टहाउस कांड का उल्लेख करते हुए कहा, ”सपा के लोगों की इस गुंडागर्दी से इनकी सरकार चली गई थी और बसपा की सरकार बनी थी. लेकिन इस घटना को भुलाकर हमारी पार्टी ने संकीर्ण ताकतों को कमजोर करने के लिए पिछले लोकसभा चुनाव में सपा के साथ तालमेल किया.”

मेरी ओर से कई बार संपर्क करने बावजूद अखिलेश तरफ से कोई जवाब नहीं आया
मायावती ने कहा, ”लोकसभा चुनाव के बाद मेरी ओर से कई बार संपर्क करने बावजूद उनकी (अखिलेश) तरफ से कोई जवाब
नहीं आया. इसके बाद हमें अलग होकर चलने का फैसला करना पड़ा.” उन्होंने दावा किया, ”राज्यसभा चुनाव के दौरान इनका दलित विरोधी चेहरा दिखा. अब सपा हमारे ऊपर भाजपा के साथ साठगांठ करके चुनाव लड़ने का आरोप लगा रही है, जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है.”

सपा को हराने किसी भी विरोधी पार्टी को अपना वोट क्यों न देना पड़े
बसपा प्रमुख ने कहा, ”हमारी पार्टी यह ऐलान करना चाहती है कि आगे जब विधान परिषद के चुनाव होंगे तब फिर बसपा
कल की घटना का जैसे को तैसा की तरह जवाब देते हुए सपा के दूसरे उम्मीदवार को हराने के लिए अपनी पूरी ताकत
लगाएगी. इसके लिए चाहे भाजपा व अन्य किसी भी विरोधी पार्टी को अपना वोट क्यों न देना पड़े.