बुलंदशहर: बुलंदशहर के स्याना गांव में सोमवार को गौहत्‍या की अफवाह के बाद फैली हिंसा और एक पुलिस अधिकारी के मारे जाने के मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. बुलंदशहर में स्थिति भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. हिंसा के दौरान मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके भाई की हत्या पुलिस के षडयंत्र से हुई है. सुनीता ने कहा ‘मेरा भाई पुलिस के षडयंत्र के कारण मारा गया क्योंकि वह दादरी के गौहत्या मामले की जांच कर रहा था.’ उन्होंने अपने भाई को शहीद का दर्जा देने और उनका स्मारक बनाने की मांग करते हुए कहा ‘मुख्यमंत्री गाय-गाय रटते रहते हैं, आखिर वह गौ रक्षा के लिये क्यों नहीं आते हैं?’

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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आनंद कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि सोमवार को हुई हिंसा के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. उन्होंने कहा कि हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. एडीजी ने बताया कि दंगा फैलाने और हत्या के मामले में दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इनमें से 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी तथा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है. इससे पहले एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है. इस जांच में पता लगाया जाएगा कि हिंसा क्यों हुई और क्‍यों पुलिस अधिकारी इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़कर भाग गए. आईजी मेरठ रेंज की अध्यक्षता में गठित एसआईटी गोकशी के आरोप और हिंसा दोनों की जांच करेगी. एसआईटी में तीन से चार सदस्य होंगे.

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बताया जाता है कि एक आरोपी योगेश राज बजरंग दल का जिला संयोजक है. इस बीच, बलिया जिले के बैरिया क्षेत्र के भाजपा विधायक सिंह ने मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में बुलंदशहर हिंसा तथा पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में हिंदूवादी संगठनों, खासकर बजरंग दल को क्लीन चिट देते हुए कहा कि ऐसी सम्भावना है कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की मौत पुलिस की गोली से ही हुई है. उन्होंने दावा किया कि बजरंग दल के लोगों ने पथराव किया था, लेकिन गोली नहीं चलाई थी.

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मारे गये इंस्पेक्टर के पुत्र अभिषेक ने कहा कि उसके पिता उसे एक अच्छा नागरिक बनाना चाहते थे जो समाज में धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा न दे. उसने कहा ‘मेरे पिता ने हिंदू-मुस्लिम विवाद के चलते अपनी जान गंवा दी. अब किसके पिता की बारी है?’ अभिषेक ने कहा कि आखिरी बार जब उसने अपने पिता से बात की थी तो उन्होंने उससे पूछा था कि क्या उसने खाना खा लिया, और पढ़ाई की या नहीं?’  मेरे पिता चाहते थे कि मैं एक अच्छा नागरिक बनूं. धर्म के नाम पर समाज में किसी तरह की हिंसा न भड़काऊं. आज मेरे पिता ने हिंदू-मुसलमान विवाद में जान गंवा दी, कल किसके पिता जान गंवाने को मजबूर होंगे. बता दें कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार साल 2015 में ग्रेटर नोएडा के बिसरा गांव में कथित तौर पर गोमांस खाने को लेकर अखलाक मॉब लिंचिंग मामले की जांच कर चुके थे.

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