लखनऊः उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में सोमवार को गो हत्या की अफवाह को लेकर भड़की हिंसा में मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह अखलाक मॉब लिंचिंग मामले की जांच कर चुके थे. 2015 में ग्रेटर नोएडा के बिसरा गांव में कथित तौर पर गोमांस खाने को लेकर भीड़ ने घर में घुसकर अखलाक नामक व्यक्ति की  पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

उस वक्त सिंह ने अखलाक के घर से सभी परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए थे. उसमें घर में रखे गए मांस का नमूना भी शामिल था. हालांकि जांच के दौरान ही उनपर आरोप लगा कि वह पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं और इस कारण उनका स्थानांतरण वाराणसी कर दिया गया था. उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) आनंद कुमार ने बताया कि इंस्पेक्टर सिंह 28 सितंबर 2015 से 9 नवंबर 2015 तक अखलाक लिंचिंग केस के जांच अधिकारी रहे. मूल रूप से इटावा जिले के टारगना गांव के निवासी सिंह ने 1998 में यूपी पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी. वह लंबे समय तक मेरठ जोन के मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों में तैनात रहे थे. सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सिंह के एक बैचमेट ने बताया कि उनकी अपराधिक मामलों की जांच पर अच्छी पकड़ थी. अखलाक लिंचिंग मामले की जांच से हटाए जाने के बाद उन्हें वराणसी और फिर मथुरा भेजा गया था. वह मथुरा के वृंदावन थाने के एसएचओ रहे. उसके बाद उनको बुलंदशहर भेजा गया था. जनवरी 2016 में वृंदावन में एक एनकाउंटर में भी वह घायल हुए थे. वह दो माह पहले स्यान के स्टेशन ऑफिसर बनाए गए थे. उनकी मौत पर मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने कहा कि हमने इस हिंसा में एक योग्य ऑफिसर को खो दिया है.