लखनऊ: बुंदेलखंड में साक्षरता स्तर चिंताजनक रहा है. खासकर गांव इलाकों की महिलाएं बचपन से ही चूल्हे-चौके में इतना रम जाती हैं कि उन्हें पढ़ने का समय ही नहीं मिलता. कई महिलाओं को अपना नाम तक लिखना नहीं आता है. घरेलू जिंदगी में उलझीं ऐसी ही महिलाओं को साक्षर करने का बीड़ा उठाया है बुंदेलखंड में काम करने वाली संस्था सोसाइटी फॉर डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स ने. संस्था के तत्वावधान में तारा अक्षर साक्षरता कार्यक्रम के तहत अब तक सैकड़ों महिलाएं न सिर्फ लिखना-पढ़ना सीख चुकी हैं, बल्कि वह इतना गणित भी जान गईं हैं कि घरेलू हिसाब जोड़ सकें.

‘तारा अक्षर’ क्लास में कॉपी किताबें लेकर पहुंचती हैं महिलाएं
महिलाओं का कहना है कि यह उनके लिए किसी जंग को जीतने जैसा है. वह अंगूठा लगाने की बजाय अपने नाम के साथ हस्ताक्षर कर सकती हैं. इन महिलाओं की उम्र 20 से 60 वर्ष के बीच है. गांवों में इन महिलाओं की अनोखी क्लास लगती है. महिलाएं कॉपी-किताबें, पेन-पेंसिल लेकर पहुंच जाती हैं. तय समय पर पढ़ाई शुरू होती है. क्लास में सवाल-जवाब होते हैं. होम वर्क नहीं कर ले जाने पर डांट भी लगती है. महिलाओं का कहना है कि वह अपने बच्चों को भी पूरे आत्मविश्वास के पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं. एक 60 वर्षीय महिला कहती है कि इस उम्र में पढ़ना-लिखना जंग जीतने जैसा है.

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56 दिन में पढ़ना-लिखना सीख रही महिलाएं
डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के बैनर तले बुंदेलखंड की अन्य जगहों के साथ ही ‘तारा अक्षर कार्यक्रम’ झांसी जिले के बड़ागांव ब्लॉक के 5 गांवों पहलगुआ, मबई, छपरा, बाबल टांडा और गढ़मऊ में चलाया जा रहा है. कार्यक्रम के तहत हर तीन माह में 150 महिलाओं को साक्षर किया जा रहा है. 8 सितंबर को अंतर्राष्‍ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर गांव पहलगुआ साक्षर हुई 30 महिलाओं को साक्षरता प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए. दरअसल, तारा अक्षर कार्यक्रम एक कम्प्यूटर आधारित साक्षरता कार्यक्रम है, जो निरक्षर महिलाओं को 56 दिनों में हिंदी पढ़ना-लिखना व गणित की जानकारी देता है. इसके बाद ज्ञान चौपाली कार्यक्रम हो रहा है, इसमें नवसाक्षर महिलाओं को साक्षरता का अभ्यास व दैनिक जीवन में जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं.

‘ज्ञान चौपाली’ में पढ़ते रहने की गुजारिश
कार्यक्रम के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर कर्नल एमएस आहलुवालिया ने कहा कि गांवों का शिक्षित होना सही मायने विकास की ओर ले जाने वाला कदम होगा. ग्राम प्रधान पहलगुआ जवान सिंह यादव ने कहा कि महिलाएं, बालिकाएं शिक्षित होकर पूरे घर को संवार सकती है. गांवों के विकास के लिए ये महत्वपूर्ण है. तारा ग्राम ओरछा से तारा अक्षर को-ऑर्डिनेटर गुंजेश कुमार गुंजन ने सभी नवसाक्षर महिलाओं से पढ़ने-लिखने की गतिविधियों को जारी रखने के लिए ‘ज्ञान चौपाली’ में पढ़ते रहने को कहा. इस दौरान सुपरवाइजर आशीष यादव, प्रशिक्षक प्रसन्न राजपूत, तारा सहेली संतोषी गौतम आदि मौजूद रहे.