बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश): निषाद पार्टी के राज्य महासचिव और 2018 बुलंदशहर हिंसा के मुख्य आरोपियों में से एक शिखर अग्रवाल पर लोगों के एक समूह को फूलन को गोली मारने वाले व्यक्ति को मारने के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है. डकैत से नेता बनी फूलन देवी की साल 2001 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किए जाने के बाद सोमवार को मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अग्रवाल और कुछ अन्य लोगों को शेर सिंह राणा को मारने की शपथ लेते हुए दिखाया गया था.Also Read - UP Police Constable Bharti 2022: यूपी पुलिस कांस्टेबल के लिए आवेदन शुरू, uppbpb.gov.in पर करें अप्लाई

कथित घटना रविवार को फूलन देवी की 20वीं पुण्यतिथि पर बुलंदशहर के शिकारपुर गांव परौली में हुई थी. बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संतोष कुमार सिंह ने कहा, “हमने शिखर अग्रवाल सहित दो लोगों के खिलाफ शांति भंग करने और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं.” Also Read - UP Police Constable Bharti: यूपी पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर आई भर्ती, कल से आवेदन शुरू, जल्दी करें

इस बीच, अग्रवाल ने कहा, “मेरे बयान को संदर्भ से बाहर ले जाया गया. मैंने यह नहीं कहा कि हम राणा को मार देंगे. हमारा मतलब यह था कि उसे (राणा को) कानून की उचित प्रक्रिया के बाद फांसी दी जानी चाहिए. लेकिन अब पुलिस मुझे और मेरे परिवार को निशाना बना रही है.” Also Read - Banke Bihari Mandir: क्या तीन महीने के लिए बंद हो रहा मथुरा का विश्वप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर? सामने आया यह बड़ा अपडेट

घटना के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा गया है, “सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए एक वीडियो के माध्यम से हमारे संज्ञान में आया कि पूर्व सांसद फूलन देवी की पुण्यतिथि परौली गांव में नरेश कश्यप के घर में मनाई जा रही थी. वीडियो में बुलंदशहर हिंसा के आरोपी को दिखाया गया है. शिखर अग्रवाल, शेर सिंह राणा को मारने के लिए घृणित और तामसिक नारे लगाकर लोगों को भड़का रहा है.”

नरेश कश्यप और शिखर अग्रवाल दोनों पर आईपीसी की धारा 505-2 (वर्गो के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है. अग्रवाल 2018 के बुलंदशहर हिंसा मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है, जिसमें कथित गोहत्या के विरोध में भीड़ द्वारा पुलिस निरीक्षक सुबोध सिंह की हत्या कर दी गई थी.

समाजवादी पार्टी की सांसद फूलन देवी की हत्या 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके सरकारी आवास के बाहर कथित तौर पर शेर सिंह राणा ने गोली मारकर कर दी थी. 13 साल बाद 2014 में राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अक्टूबर 2016 में जमानत दे दी थी.